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चलो हम भी जी ले ते हैं। "
पीने का मन करता है तो पी लेता हूँ फटी जिदंगी को सपनों के धागे से सिल लेता हूँ। अब तलक कष्ट काटें हैं कष्ट काटने की प्रेकि्टस हैं ना चाहत के, ऐसे हीजी लेता हूँ। रम पी लु या गम पी लू गुLसा पी लु या सEमान से ऐ " शिवराम" जरा सी दारु ही पी लु । कया रखा हैं, इस अपमानजनक दुनिया मे, में जरा सी, इजजत पाने को, कु ना मैं, थोड़ा सा सोमरस पी लु । खाली खाली बचपन बीता, खाली बीता यौवन, खालीपन को भरने को, ऐ " शिवराम" चले बचचन की" मधुशाला" मे इक घूंट मधु पी लु । |
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Monday, 27 January 2020
" चलो हम भी जी ले ते हैं। "
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