अन्तर : तब में और अब में
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तब खुशबू आती थीं गाँव की मिट्टी में
अब बदबू सी आती हैं गाँव के लोगों में
तब संबंधी बंधे रहते खून के रिश्ते से
अब भाई भाई बंध रहें स्वार्थ के रिश्ते से
तब प्रेमी प्रेम करते आँखों से आँखों को
अब प्रेमी प्रेम करते होठों से होठों को
तब लोग फूलसा सूंघते थे घरवाली को
अब लोग ईत्रसा सूंघते हैं बाहरवाली को
तब लोग बहन मानते दोस्त की बहन को
अब लोग प्रेमिका मानते दोस्त की बहन को
तब आदर्श मानते थे घर के बुजुर्ग को
अब असबाब मानते है घर के बुजुर्ग को
तब लोग सिद्धांतवादी थे राजनीति में
अब लोग स्वार्थवादी हैं राजनीति में
तब पांचाली का चीर छीना था कौरव सभा में
अब नग्र पांचाली खुद बिकती हैं बार-होटलस् में
तब काँहा नहाती गोपियों के कपड़े चूराता था मथुरा में
अब काँपते हैं प्रेमी एंटी रोमियों स्क्वायड से यू पी- मथुरा में
सादर: एस आर मीमरोठ
दिनांक: 03.04.17
समय : 21.15 बजे
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तब खुशबू आती थीं गाँव की मिट्टी में
अब बदबू सी आती हैं गाँव के लोगों में
तब संबंधी बंधे रहते खून के रिश्ते से
अब भाई भाई बंध रहें स्वार्थ के रिश्ते से
तब प्रेमी प्रेम करते आँखों से आँखों को
अब प्रेमी प्रेम करते होठों से होठों को
तब लोग फूलसा सूंघते थे घरवाली को
अब लोग ईत्रसा सूंघते हैं बाहरवाली को
तब लोग बहन मानते दोस्त की बहन को
अब लोग प्रेमिका मानते दोस्त की बहन को
तब आदर्श मानते थे घर के बुजुर्ग को
अब असबाब मानते है घर के बुजुर्ग को
तब लोग सिद्धांतवादी थे राजनीति में
अब लोग स्वार्थवादी हैं राजनीति में
तब पांचाली का चीर छीना था कौरव सभा में
अब नग्र पांचाली खुद बिकती हैं बार-होटलस् में
तब काँहा नहाती गोपियों के कपड़े चूराता था मथुरा में
अब काँपते हैं प्रेमी एंटी रोमियों स्क्वायड से यू पी- मथुरा में
सादर: एस आर मीमरोठ
दिनांक: 03.04.17
समय : 21.15 बजे
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