Sunday, 5 January 2020

जुदा कर पाओ तो जाने

जुदा कर पाओ तो जाने
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खुशबू को बोतल में बंद कर दिया
गुलाब से इत्र बना के
सदियों पहले नूरजहाँ की अम्मी ने
मगर फूल को खुशबू से
खुशी 😃 को अहसास से
जुदा कर पाओ तो जाने।

सूरज को रोशनी से
आकाश को सितारों से
कुमुदिनी को चँन्दा से
हल्दी को दुल्हन 👰 से
सपनों को नींद से
जुदा कर पाये तो जाने।

मछली को पानी से
हवा को सांसो से
शमां को परवाने से
NWR इलेक्ट्रिकल टीम को 
मेडम जी अपने मनसे
जुदा कर पाओ तो जाने।

धडकन को दिल 💘 से
नजरों को चहेते चेहरे से
मोबाइल को सिम से 
अश्कों को नैनो से
जुदा कर पाओ तो जाने।

आत्मा को रुह से
चाहत को आँखों से
मुस्कान को होठों से
प्यार को दिल 💘 से
गुदगुदी को उंगलियों से
 महफ़िल को मेहमानों से
जुदा कर पाओ तो जाने।

नींद को बिस्तरों से
भूख को रोटी से
प्यास को पानी से
काजल को आँखों से
लाली को होठों से
सुर्ख सोखियों को गालों से
परछाई को शख्सियत से
जुदा कर पाओ तो जाने।
सादर : एस आर मीमरोठ

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