Sunday, 5 January 2020

दीपावली V/s सीता का सम्मान

दीपावली V/s सीता का सम्मान
---------------------------------
अल्लाह, ईसा, गौतम,
"शिवराम" कृष्णा जैनिज्म,
भगवान और सब धर्मगुरु
ये त्यौहार आपके नही हैं
ये त्यौहार, हम इंसानो के है,
जात धर्म को भूल के अब
सब भाइयों को आपस में
गले मिलन को आने दो,
इंसान है हम, हमे इंसान ही रहने दो।
नफरत का अंधकार मिटाये
आओ बन्धु ,
प्रेम के दीप जलाये
आपस में दिल लगाके
आओ! दोस्त दीपावली मनाये ।
ये जो आज दीपावली है
लंकापति रावण की हार का ही नहीं है किस्सा
ना ही ये हैं, केवल श्रीराम की जीत का किस्सा।
ये जो दीपावली है, ये तो केवल,
दशरथ की बड़ी पुत्रवधु
" सीता" मैथिलि
के कष्टमय जीवन का
अपमानमय जीवन का / की यादों का हिस्सा है।
दुनिया में सर्वप्रथम रामायण में ,
अपमान हुआ था नारी का !
गैर मर्द ने देख अकेली पंचवटी से हरण किया था सीताजी का,
पतिव्रता नारी का।
अपना घर शहर अयोध्या में
धोबी का ताना सुन कर
परिवार के सम्मुख त्यागी थी पतिव्रता सीताजी को,
जीते जी धरती में समां गई ,
ऐसी वो सत्यवती वैदेही थी।
पतिधर्म की मर्यादा तोड़ने वाले
अर्धांग्नी पत्नी को त्याग ने वाले
वनगामी दयाहीन श्रीराम को
फिर भी लोग भला क्यों ?
मर्यादापुर्षोतम कहते हैं
फैसला आपको करना है
बस !
दीपावली पर्व है,
राम-रावण के नाकारापन को
याद करने का
या फिर एक पवित्रता नारी मैथिलि की महानता की मिसालें याद करने का।
दीपावली की शाम को
सब पूजते है लक्ष्मी जी को
जबकि ! न लक्ष्मी जी के पास टकसाल हैं,
ना ही कुबेर के पास RBI का लॉकर हैं।
फिर भी हम बने हुए हैं क्यों
जॉनी वॉकर ?
"मीमरोठ " आह्नान करता हैं
इस दीपावली से शुरू करे,
सम्मान करना नारी का
पूजना शुरू करे सीता को
जो रूप धारण करती है
शक्ति का,
कभी नव दुर्गा, पार्वती का
कृष्ण की राधा का
और वही रूप चरित्र है
सभी की भार्या का।
सादर: शिव राम मीमरोठ

No comments: