आम आदमी का वजूद
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हम तो आम आदमी है
हमारी गिनती नही होती
हम हर रात में बढ़ जाते हैं
बिना नाँव की नदी किनारे
खाट बिना हम सड़क किनारे
दिन में दूने रात चौगने बच्चे
पैदा करते हैं ।
हमारी गिनती नही होती
हम हर रात में बढ़ जाते हैं
बिना नाँव की नदी किनारे
खाट बिना हम सड़क किनारे
दिन में दूने रात चौगने बच्चे
पैदा करते हैं ।
नेट कनेक्शन स्मार्ट फोन , टीवी नही हैं लेपटॉप
मनोरंजन का साधन नही तो,
मनोरंजन की रिसर्च में कभी बॉटमटॉप, कभी लैपटॉप और
मनोरंजन का बाई प्रोडक्ट
दिन में दूने रात चौगने बच्चे पैदा होते हैं , हम आम आदमी ऐसे होते हैं।
मनोरंजन का साधन नही तो,
मनोरंजन की रिसर्च में कभी बॉटमटॉप, कभी लैपटॉप और
मनोरंजन का बाई प्रोडक्ट
दिन में दूने रात चौगने बच्चे पैदा होते हैं , हम आम आदमी ऐसे होते हैं।
अख़बारों फोटो नही छपती
टीवी पर कभी live नही होते
ऑन लाइन ऑफ लाइन में को छोड़के
नोट बंदी से नस बंदी तक एटीएम से हॉस्पिटल तक
हर लाइन में हम ही हम दीखते , ऐसे आम आदमी हैं
टीवी पर कभी live नही होते
ऑन लाइन ऑफ लाइन में को छोड़के
नोट बंदी से नस बंदी तक एटीएम से हॉस्पिटल तक
हर लाइन में हम ही हम दीखते , ऐसे आम आदमी हैं
नेता अफसर और व्यापारी सारे हमको यूज़ करे
टेस्ट हमारा नमक के जैसा
कम डाला तो मजा नही
ज्यादा डाला तो खाया जा नही
हमको हैंडल करना हैं मुश्किल
हम तो आम आदमी हैं।
टेस्ट हमारा नमक के जैसा
कम डाला तो मजा नही
ज्यादा डाला तो खाया जा नही
हमको हैंडल करना हैं मुश्किल
हम तो आम आदमी हैं।
आजादी का दांडी मार्च हो
या फिर हो दिल्ली में मफलर खांसी के धरनों के लश्कर में हम ही तो होते हैं,
अन्न के लिए तड़पता हैं ऐसे अन्नदाता है हम
अन्न छोड़ने पर अन्ना हजारे के, हजारों में हम आते हैं
ऐसे आम आदमी हैं हम।
या फिर हो दिल्ली में मफलर खांसी के धरनों के लश्कर में हम ही तो होते हैं,
अन्न के लिए तड़पता हैं ऐसे अन्नदाता है हम
अन्न छोड़ने पर अन्ना हजारे के, हजारों में हम आते हैं
ऐसे आम आदमी हैं हम।
गोरे लोगो के कालाधन में से 15 लाख मिलेंगें हम को
कालाधन पाने की ललसा में
झूठे वादे, झूठे जुमलो के बहकावे में आ करके हमने
साधारण सा दाढ़ी वाले दगेबाज, जुम्लेबाज भगोडे को देश का सिरमौर बना डाला ऐसे है हम आम आदमी ।
कालाधन पाने की ललसा में
झूठे वादे, झूठे जुमलो के बहकावे में आ करके हमने
साधारण सा दाढ़ी वाले दगेबाज, जुम्लेबाज भगोडे को देश का सिरमौर बना डाला ऐसे है हम आम आदमी ।
इतना तो हम भी जानते है
कांठ की हांड़ी एक बार ही चढ़ती ,
विकास तो पागल हो गया
जुम्लेबाजों का
पप्पू ! अब तो आगे आकरके आम आदमी से कह दो की कुछ मीठा हो जाये,
मीठे की लालच में पक्का बहकेंगे हम
हम ऐसे आम आदमी है।
कांठ की हांड़ी एक बार ही चढ़ती ,
विकास तो पागल हो गया
जुम्लेबाजों का
पप्पू ! अब तो आगे आकरके आम आदमी से कह दो की कुछ मीठा हो जाये,
मीठे की लालच में पक्का बहकेंगे हम
हम ऐसे आम आदमी है।
सादर : शिव राम मीमरोठ
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