Sunday, 5 January 2020

हमने उसको छोड़ था

हमने उसको छोड़ था
या उसने ही हमको छोड़ दिया
 कशमकश में नक्शा बदल गया जिनदगी का
 बालकोंनी शैष रह गईं।

महल बनाया सपनों का
साथ ले कर अपने का
मोहब्बत के आँधियाँ में
वो नीव की बन गये
 मैं कँगुरा  शैष रह गये।

हिमालय सी ख्वाहिशें दिल 💘 में
रख कर
 हम अमरकण्टक सा रह गये
पर मिसाल ए मोहब्बत वो
मन्दाकनी, भागीरथी
नर्मदा बन कर
मेरे मन के हर कंकर को
समझ के शंकर
आँसुओं मे भिगो गई।

सादर: शिवराम मीमरोठ

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