शीशा: अभाव व अभास
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शीशा बहुत कमज़ोर होता हैं दोस्तों
जरा सी चोट से दरक जाता हैं दोस्तों
जरा सी चोट से दरक जाता हैं दोस्तों
शीशा पारदर्शी होता हैं दोस्तों
सबके लिए निष्पक्ष होता हैं दोस्तों
सबके लिए निष्पक्ष होता हैं दोस्तों
अमीर को तो सच दिखाता हैं दोस्तों
गरीब को भी सच ही दिखाता हैं दोस्तों
गरीब को भी सच ही दिखाता हैं दोस्तों
सुन्दर को सुन्दरता दिखता हैं दोस्तों
कुरुप को भी सँवार देता हैं दोस्तों
कुरुप को भी सँवार देता हैं दोस्तों
इक शीशे मे इक चेहरा दिखता हैं दोस्तों
टूटे हुए टुकड़ों में चेहरे दिखते है दोस्तों
टूटे हुए टुकड़ों में चेहरे दिखते है दोस्तों
सलमत शीशा मनमोहक होता हैं दोस्तों,
टुकड़ों में शीशा दुखदायक होता हैं दोस्तों
टुकड़ों में शीशा दुखदायक होता हैं दोस्तों
सुर्पनखा की लंका में शीशा होता हैं दोस्तों
सीता हरण यही से शुरू होता हैं दोस्तों
सीता हरण यही से शुरू होता हैं दोस्तों
पानी में शीशफर्शसा धोखा होता हैं दोस्तों
द्रौपदी का चीर हरण का कारण होता है दोस्तों
द्रौपदी का चीर हरण का कारण होता है दोस्तों
हिम पर हिमखन्डो में शीशाभास होता हैं दोस्तों
युधिष्ठिर को दुर्योधन द्रौपदी संवाद याद होता है दोस्तों
युधिष्ठिर को दुर्योधन द्रौपदी संवाद याद होता है दोस्तों
शीशा दुल्हन का सिंगार होता हैं दोस्तों
शीशा मुर्दे के लिए असबाब होता हैं दोस्तों
शीशा मुर्दे के लिए असबाब होता हैं दोस्तों
सादर : शिवराम मीमरोठ
दिनांक: 11.05.17
समय: 08.30 hrs
दिनांक: 11.05.17
समय: 08.30 hrs
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