17 अक्टूम्बर V/s एक बेवफा महजबी का जन्म दिन !
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देखलो ! आज कितनी सोभाग्य्वती यामनी है , बादलों में नही तो क्यां ? धरा के दामन में दामनी हैं .
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देखलो ! आज कितनी सोभाग्य्वती यामनी है , बादलों में नही तो क्यां ? धरा के दामन में दामनी हैं .
माँ की ममता नदी सी उमड़ रही है, नृप से खुश है पिता, कुल में उनके जन्मी है आज, साक्षात शक्ति, दुर्गा, पार्वती या सीता .
छु: न सके हवा भी उन्हें ,अनुज-अग्रज खड़े हैं, बनके अडिग हिमालय, इठ्लालो आज तुम, आँगन की शोभा है जो, कल चली जाएगी वो शिवालय .
आज जन्म उत्सव हैं उनका, मेरे आंगन में, फूलों सी सज रही है दीयों की कतारे, ऐ महजबी ! लायलित हैं, तुम्हे छूने को, आज जमीं के और आसमां के सभी सितारे,
कोईं भूल नही जाये, जन्म दिवस १८ वां उनका हैं आज, जो हैं दिल की धडकनों का राज, वो ! रम्भा, उर्वशी, मेनका, हेमा, एश्वर्या, कैटरिना सी सूरत की, मैं बनता हूँ, जन्म कुंडली आज.
उनसे मिलन की उस घड़ी में,रब से मिलन की नहीं थी ख्वाहिश, मैं करता हूँ अपने नक्षत्रों पर नाज,
कागज पर, कागज की, पंक्तियों में, अब मैं लिख रहा हूँ आज, उस ताजमहल के शिलान्यास का राज.
कागज पर, कागज की, पंक्तियों में, अब मैं लिख रहा हूँ आज, उस ताजमहल के शिलान्यास का राज.
वो समय क्यां खूब था दोस्तों ? माह अक्टूम्बर का, तारीख थी तीन कम बीस, सन बीस कम दो हजार, हम बेबस हैं थे तो क्यां हुआ ? बस में नहीं था, तो नहीं छुआं ! करते हैं अब दुआ, तुम जिओ वर्षों हजार .
विदर्भ प्रदेश, कार्तिक का महिना,नर्भदा के तट पर दीपावली सा शमां हैं, उनके जन्म उत्सव का मास हैं, तीन भाइयों की इकलोती वो बहना हैं,दीपक से उसके जो नैना हैं,वो मेरे लिए आम नही,बेहद खाश हैं .
सादर: शिव राम मीमरोठ ( दिनांक :17.10.1998, समय : 20.00 )
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