Sunday, 5 January 2020

" मन की बात "

" मन  की  बात  "

लोग कहते हैं कि आज है,
 १४ जनवरी,
  आज है  मळ मास का अंत ,,
केवल मळ मास का ही तो अंत है,
मन के मळ नहीं,
हर साल मन का मळ बढ़ा रहे हैं, हम,
क्योकि
आर्यावर्त  में  पूजय हैं आसाराम संत ।

भारत की  तो छोड़ो बातें,
महाभारत  की कर लेते हैं
तीन तीन बहनों का अपहृता,
भीष्म, भ्रम , गंगा पुत्र, देवव्रत,
अनब्याहा पितामह कहलाता हैं ,
मळ मास में ही हुआ था उसका अंत।

सूर्य देव के उत्तरायण होने पर भारत  में,
 उजाले / बृद्धि का प्रतीक पर्व
"मकरसंक्रांति" को ही भीष्म ने,
त्यागी थी, देह !
इच्छामृत्यु वरदान पाकर भी न कर सका,
मन का मळ का अंत।

साल में  ३६४ दिन करते हैं,
बुरे कर्म करते हैं,  पापि, अन्ययी,
देखो तो सही,
तीन सौ पैसठवें
" केवल एक दिन में ही "
 चाहते हैं धोने तन, मन का मळ।

जब तलक नही धुलेगा,
मजदूर से पी एम,
मन का मळ,
नहीं रूकेगें दुराचार, अत्याचार,
भ्रष्टाचार,
रूखा मन की झूठी बातों से।

कुछ फर्क नहीं  पड़ेगा " शिवराम"
नोट 📝 बंदी से,
वोट बंदी से,
रोड बंद से,
पार्लियामेंट बंदी से,
आर्थिक मंदी से,
जबतलक नहीं करेंगे
मन के मळ का अंत।

सादर : शिवराम मीमरोठ

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