तुम जबसे मुस्कराह रही हों,
गालों के डिंपल, तेरे ये पिंपल
मुझकों यूँ ही ये तड़पा रहे है,
जरा पास आओं, गले लगा लूँ
तुम कुछ और नहीं मेरी छायां हो ।।
तुम जबसे मुस्कराह रही हों,
गालों के डिंपल, तेरे ये पिंपल
मुझकों यूँ ही ये तड़पा रहे है,
जरा पास आओं, गले लगा लूँ
तुम कुछ और नहीं मेरी छायां हो ।।
तुझे न इश्क़ है,न मेरी फ़िक्र है
ये तिरा स्वभाव है,तिरी ख़ामोशी?
मुझे तिरी फ़िक्र कुछ ज़्यादा है,
न तू दोषी न मैं,ये मेरा दिल दोषी।
शायद उन्हें फ़िक्र नहीं मेरी,
इसमें उनका कोई दोष नहीं।
मुझे उन पर कुछ ज़्यादा फ़ख़्र है
गलती मेरी,इसमें उनका दोष नहीं।