Thinker, Poeoter, Writer and Philosopher
तुम जबसे मुस्कराह रही हों,
गालों के डिंपल, तेरे ये पिंपल
मुझकों यूँ ही ये तड़पा रहे है,
जरा पास आओं, गले लगा लूँ
तुम कुछ और नहीं मेरी छायां हो ।।
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