Friday, 14 March 2025

बोलने को तो हर कोई हैप्पी होली बोलता है।

कैलाश ने मुझे हैप्पी होली बोला तो मैंने भी कैलाश, सुनील, रघुनंदन और पुरुषौतम आप सभी को एक साथ हैप्पी होली तो बोला मगर क्वेशन प्रतिक्रिया में मेरे ही मुखारविंद से ही निकला था, सभी हैप्पी होली बोल तो रहे हो एक दूसरे को, ऐसे तो सभी बोलते आ रहे है सदा सदा से मगर क्या कोई किसी को ख़ुशी दे पाया है आज तक या यूँही समाने वाले की होली जलने और जलाने की ख़ुशी में ख़ुश हुए उसकी बर्बादी की शुभकामनाएँ देते रहे होंगे, हम कभी से या अभी से। ऐसा तो नहीं, नहीं ऐसा तो नहीं पौराणिक काल में भी होली की शुभकामनाएं दी जाती रही है। यूँ तो राजा जनक के स्वयंबर में राम ने रावण को बोला हैप्पी होली और रावण ने राम को भी बोला हैप्पी होली, फिर भी रावण की लंका क्यों जली? कृष्ण ने कंस को बोला कंस मामा हैप्पी होली और कंस ने कान्हा को बोला हैप्पी होली फिर भी मामा कंस का क्या हुआ जग जाहिर है। युधिष्ठर ने दुर्योधन को हैप्पी होली बोला, द्रौपदी ने देवर दुर्योंधन को बोला आओं देवर जी होली खेले, आपको होली मुबारक हो और लौटते वक्त जलाशय को संगमरमर की फर्श समझ जलमग्न हुआ तो पांचाली फिर बोली बुरा ना मानो देवर जी होली पर तुम तो रहे अंधे के अंधे ही------------

बोला तो अर्जुन ने कर्ण को भी था सूथपुत्र हैप्पी होली और सूथ शब्द सुन गुस्से में फॉर्मल्टी निभाते हुए होली से ज़्यादा दिल जलते हुए कर्ण बोला तो सही पंतु उल्टा बोला होली हैप्पी कौंतैय!अगली होली कुरुक्षेत्र में खेलेंगे और फिर शुरू हुआ शुभकामनाओं का दौर जो कुरुक्षेत्र में जा के थाम। यूक्रेन ने रूस को और रूस ने यूक्रेन को बोला हैप्पी होली और कीव और खारकिव होली से जलते रहे , भारत ने पाक औरपाक ने भारत न को बोला हैप्पी होली फिर भी कश्मीर में खून की होली खेलते रहे, इतना ही नहीं चाइना ने अमरीका को और अमरीका ने चाइना को बोला हैप्पी होली और दोनों बाजार में पिचकारी और गुलाल बेचते बेचते रहे दुनिया को दिखाने, और बनाते रहे एटमबॉम और बारूद के ढेर। अजी छोड़ो साहिब जी ये तो सम्राटों की राजनीति की बातें हुई अब दिल की बाते भी करलो होली के अवसर पर कब कब तारतार हुए होली पर रिसते, सीता ने कैकयी को बोला हैप्पी होली और फिर जो हुआ की सीता की होली कुछ जंगल में गुजरी तो कुछ लंका में गुजरी, राम ने झूठे बार सबरी के खाये सबरी ने भी प्रभु श्रीराम को हैप्पी होली बोला और मस्तमलंग होके बावरी हुई जंगल जंगल गति रही "मेरी कुटियाँ के भाग्य खुल गए श्री राम जो आए मेरी कुटियाँ के भाग्य खुल गए । रामराज्य स्थापना के बाद एक दिन प्रातकाल राम नगर भ्रमण के लिए निकला तो धोबी धोबन से कह रहा था कि अब तो ख़ुश हो खूब हैप्पी होली खेल आई सारे मौहले के भड़ुओं के साथ, बता साली धोबन तू रात कहाँ रही किस किस के साथ रात भर होली का रंग भर भर पिचकारी डलवाती रही और धोबन अनुनय विनय करती रही कि साहिब मैं तो मेरी सखी के घर थी वही पर होली के गीत "धौल्या" गति रही और हम चार पाँच सभी सहेलियाँ उसके घर ही सो गए, पौ फटते ही हम सब अपने अपने गहर रवाना हुई तो मैं भी आ गई। धोबी चिल्ला के बोला मुझे पगला समझ रखा है क्या? मैं नहीं आने वाला तेरे झांसे में तू रातभर घर से बाहर कहीं भी रही हो "मेरी तो इज्जत पूरे मोहल्ले में तारतार हो गई, ऐसा भला तो श्रीराम ही है जो लंका रह आई सीता की अयोध्या के राजमहल में ले आया। मैं तो मेरी कुटिया में तुझे नहीं रख सकता,आख़िर मेरी इज्जत का सवाल जो है।" बस, सीता जी को हैप्पी होली बोलते बोलते ही अगले ही दिन श्रीराम ने भी धोबी की बातों में आके सीताजी को पुनः वनवास सिधारने के फरमान जारी कर दिए और बाद में धरती में समा गई । और तो और राधा भी बोली श्रीकृष्ण से हैप्पी होली और श्रीकृष्ण न केवल बोला बल्की राधा संग खूब होली खेली जो आज भी ब्रज की होली के नाम से मशहूर है, मगर बाद में कान्हा मथुरा वृन्दावन छोड़ द्वारिका चले गए द्वारिकाधीश बनने और जीवनपर्यंत राधा की आँखों से पिचकारी के रंग के मानद 'प्रेमाशूँ' बहते रहे। क्या यूँ ही दी जाती रही और रहेंगी हैप्पी होली की शुभक्मनाएँ। शौले फ़िल्म में पहले तो ठाकुर ने गब्बर को बोला हैप्पी होली फिर गब्बर ने ठाकुर को बोला हैप्पी होली, गब्बर ने होली खेलने ही तो पूंछा था सांभा और कितने आदमी है? फिर भाभी बंसती से गब्बर झूमते हुए ही तो बोला था नाच बसंती नाँच और धर्म ने पाप का हिसाब बताते हुए आदेश फेंके बसंती " कुत्तों के सामने नहीं नाचना"

साभार : चड्ढी किसने गिफ्ट में दी?(मेरी आगामी व्यंग पुस्तक)
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