दुनिया हमको समझ गयी हम दुनिया को समझा नहीं पाये,
महनतकश हैं , ईमानदार है हम , निठल्ले इतनसा समझ नहीं पाये---(१)
झूठी कसमें खाने वाले , झूठा पानी पीने वाले अब तुम्हारा
मान नहीं, सम्मान नही बिन ईज्जत के तुम मन दर्पण में कैसे जी पाये ----(२)
चंद रूपये की लालच मे पहरेदार लूटरे क्यों बन बैठे,
ईमानदारी की पहेलियाँ युवा क्यो नहीं समझ पाये----(३)
अदब से कुर्सी पर बैठे सरकारी मुर्दे मुद्रा की मुद्रा में,
मुफ्त के शमशान मे खुद की अर्थी को उजाला दिखाने चिगांरी ढुढंते हैं
पहली मुलाकात मे उन्हें देखकर लगा था कि कोई हिन्दुस्तानी मर्द हैं,
अंदाज ए बयाँ जब देखा उनका तो हम समझे कि ये तो पाकिस्तानी नामर्द हैं।
महनतकश हैं , ईमानदार है हम , निठल्ले इतनसा समझ नहीं पाये---(१)
झूठी कसमें खाने वाले , झूठा पानी पीने वाले अब तुम्हारा
मान नहीं, सम्मान नही बिन ईज्जत के तुम मन दर्पण में कैसे जी पाये ----(२)
चंद रूपये की लालच मे पहरेदार लूटरे क्यों बन बैठे,
ईमानदारी की पहेलियाँ युवा क्यो नहीं समझ पाये----(३)
अदब से कुर्सी पर बैठे सरकारी मुर्दे मुद्रा की मुद्रा में,
मुफ्त के शमशान मे खुद की अर्थी को उजाला दिखाने चिगांरी ढुढंते हैं
पहली मुलाकात मे उन्हें देखकर लगा था कि कोई हिन्दुस्तानी मर्द हैं,
अंदाज ए बयाँ जब देखा उनका तो हम समझे कि ये तो पाकिस्तानी नामर्द हैं।
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