कौनसी दीपावली:,
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दीपावली ! आज फिर आई है,
नई सी लगती हैं,
नई तो नही हैं,
ये तो वो ही पुरानी दीपावली की पुनरावृति हैं।
नई तो नही हैं,
ये तो वो ही पुरानी दीपावली की पुनरावृति हैं।
दीपावली ! आज मां लक्ष्मी पूजन का पावन पर्व भारत मे हैं,
फटाखो की गूंज भारत मे हैं
हम दिवाली नही देश का दिवाला मन रहे है
दीपक-फटाखों की कीमत में 50 % पर चीन का हिस्सा हैं।
फटाखो की गूंज भारत मे हैं
हम दिवाली नही देश का दिवाला मन रहे है
दीपक-फटाखों की कीमत में 50 % पर चीन का हिस्सा हैं।
दीपावली ! आनन्द,उत्साह , जोश से ज्यादा दिखावा हैं,
खुशी का पर्व अब मात्र प्रदूषण व व्यापार का पर्व बन गया है
खुशी का पर्व अब मात्र प्रदूषण व व्यापार का पर्व बन गया है
दीपावली ! खुशियों का पर्व हैं या या शॉपिंग का टशन हैं,
मैंने देखा! गरीब दुकान के बहार ग्राहकों से आटा मांग रहे है।
मैंने देखा! गरीब दुकान के बहार ग्राहकों से आटा मांग रहे है।
दीपावली! किसकी दीपावली, गरीबी की या अमीरों की हैं
गरीब गाय आज भी अमीरों शेरों के शोषण की शिकार हैं।
कोई पहल ही नही करता पहलू के लिये
दीपक सबने जलाये!
पर अखलु के किया अलख किसी ने जलाया।
गरीब गाय आज भी अमीरों शेरों के शोषण की शिकार हैं।
कोई पहल ही नही करता पहलू के लिये
दीपक सबने जलाये!
पर अखलु के किया अलख किसी ने जलाया।
दीपावली किसकी ! इंसानों की या पशु या रिवाजो की हैं,
इंसान यहाँ पशुओं बदतर हैं, पशुओं यहां को पूजा जाता हैं।
इंसान यहाँ पशुओं बदतर हैं, पशुओं यहां को पूजा जाता हैं।
दीपावली! कोनसी ,असमानता का अन्धकार मौहल्ले मे हैं,
झूठी मुस्कान फुलझड़ीसी होठों पर, मन नफरत कालिख़ हैं।
झूठी मुस्कान फुलझड़ीसी होठों पर, मन नफरत कालिख़ हैं।
दीपावली मनाते है
सीता-राम के अयोध्या आगमन का पर्व हैं,
लोगों के ताने मारने पर ,
श्रीराम की अयोध्या ,
छोड़ के अकेले ही वन के लिये
चल पड़ी अजन्मे लवकुश की माँ
गर्भवती सीताजी को अयोध्या से वन प्रवास
फिर भी दीपावली का , गर्व हैं।
सीता-राम के अयोध्या आगमन का पर्व हैं,
लोगों के ताने मारने पर ,
श्रीराम की अयोध्या ,
छोड़ के अकेले ही वन के लिये
चल पड़ी अजन्मे लवकुश की माँ
गर्भवती सीताजी को अयोध्या से वन प्रवास
फिर भी दीपावली का , गर्व हैं।
सादर: शिव राम मीमरोठ
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