Sunday, 5 January 2020

" युगपरिवर्तकअम्बेडकर V/s श्रीकृष्णयुगांधर"

युगपरिवर्तक V/s युगांधर"
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शीतल हवा का एक झोका आया ,
और चला गया
प्राणवायु बन
 फेफड़ो के रास्ते स्वास के वास्ते
रक्तकणों तक पहुचं कर,
 वापस रूप बदल कर
नाशिका द्वार से ब्रह्मांड में समा कर।

 वही मथुरा-
गोकुल के घने जंगलो की हरियाली मेंं शामिल हो
मथुरा से आया या 
वृन्दावन से आया
या द्वारका से आया
परन याद तो किया जाएगा केवल
"कुरुक्षेत्र " के
एकलवक़्ता एकलश्रोता के रूप में हुए
गीता संवाद की याद में।

हवा पुनः 
फिर आई,
पर अब न तो देवकी के पल्लू से आयी
और न यशोदा मैया के आँगन से
हवा तो आयी गौतमी के आँचल से
यशोधरा की सााँसों से 
और
वही राधा का स्नेह समर्पण लिए,
 सुजाता की
मीठी खीर से ।

वहीं नन्द का लल्ला वासुदेव
सिदार्थ गौतम बुद्ध बन गया ,
और बोधगया में
बोधिवृक्षय के नीचे वंशी बजैया,
 बैठ गया नए रूप में
और वो ,
जाने गये देश- विदेशों में ,
दुःख मुक्तिमार्ग से ,, त्रिपिटक,, के रूप में
चीन,जापान,श्रीलंका थाईलैंड में ।

बात अभी खत्म नहीं हुई, 
शुरू हुई है
वही दिव्यात्मा, दृढ़संकल्पी
दुनिया भृमणि _ज्ञानपिपासु
मुफलिसी ऐसी की,
 जठराग्नि न बुझी,
परन असल भूख थी मन मे
 समरसता की
जा खंगाली ग्रंथालय UK, USA में,
हार्वर्ड में, ऑक्सफ़ोर्ड में, कैम्ब्रिज में,
कारण साफ था ,
आर्यवर्त के गुरुकुलों में
उच्च कुल वंश योग्यता थी दाखिला की ।

नीली छतरी की नीचे,
 नीलवस्त्रधारी
क्लासरुम से बहार बैठने वाला ही कहलाया
"सिंबल ऑफ नॉलेज " 
विदेश में
महागरीब, 
माहगरीबी से निकला,
 महागरीबों के लियेे
गरीब विधुर के घर सागभाजी खाने वाला ,
वही मसिहा
निवस्त्र द्रोपदी को वस्त्रवर्ण देनेवाला ,
वही
'' युगांधर'' द्वारकाधीश
कभी गौतम तो 
अभी अंबेडकर बन जन्मा।

और अब की बार न इंद्रप्रस्थ में , 
न ही हस्तिनापुर में
वरन '' इंडिया" में युगपरिवर्तक बना
अस्त्र नही ,
सस्त्र नही और
 न ही सुदर्शन चक,
अब कलमस्त्र धारण किया,
मयूरपंखी का वही गहरा नीला रंग को
हर दिन 
पोशाक बना कर पहन लिया।

कहत मीमरोठ सुन शिव राम
शीशनमन हर क्षण क्षण ,
किया तो भी कम ही किया,
याद किया जाता है ,
बाइबिल के मसिहा सा
कुरान के पैगम्बरसा तथा
 गीता के कृष्णसा
बाबा तो याद किया जाएगा सदा
हे- शिव राम वो

 
" शिव नहीं थे, 
राम नही थे"
थे तो 
साक्षात " कृष्ण" के आधुनिक अवतार थे
दीन- दुखी गरीब वंचितों के मधुसूधन थे।

आर्यवर्त के पांचवे वेेेद 
" भारत सँविधान" रचियता
संसद संवाद में सांसदों द्वारा 
" सँसद" में
कानूनविद को ,
न्यायालय में न्यायमूर्तियो द्वारा
आधुनिक द्वारकाधीश ,
 न्यायाधीशों द्वारा 
भारत मे ही नही, 
भारत के बहार भी,
U N O में पैनखुदा के रूप में,
सदा सदा याद किया जाएगा,
 निलवर्णधारी को
मयूरपंखधारी सम जगत में
मृत्यु उपरांत मोक्ष्य के बजाय,
याद किये जायेंगे सदा ,
अश्पृश्यता निवारक के रूप में।

सादर : शिव राम मीमरोठ

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