Sunday, 5 January 2020

लोग तिरंगे के नीचे "

" लोग तिरंगे के नीचे "

लोग तिरंगे के नीचे
सावधान खडे होके
बयां करते हैं,
पूर्वजों के चरित्र को,
शहीदों की शहादत को
 केवल साल मे दो  दिन
शैष दिनों  में  भूल जाते हैं,
वतन  तक को,
व्यस्त हो जीविकोपार्जन की आढ में
स्वार्थ सिद्धि में
या फिर अनैतिकता में, अत्याचारों में
झूठी कसमें भी वतन की खाते
मनोरंजनी देशभक्ति के गीत गाते
दिन हो या रात 🌃 में
घर में  या दफ्तर में
बाज़ार में, नहीं तो मेले  में
रिश्वतखोर , रिश्वत लेते।

ये सौदेबाज़  है चूकते नहीं,
कतई
वतन की सौदेबाजी से ,
बहुत माहिर
हो चुके हैं ,
 सौदेबाजी को वफादारी का नकाबपोशी
करके्
वाहवाही लूटते  में
बेचते हैं सरकारी फैक्टरी को,
 2G, 3G, 4G स्पक्ट्रम को,
रिफायनरी पैट्रोलियम को,
माइन्स को, सेज की लैन्ड को,
को बेच लेते हैं

सादर: शिवराम मीमरोठ

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