वो ही साली बेवफा निकली
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उस दिन चाँद गगन में था
और चाँदनी धरती पर थी
राते रंगिन इतनी थी कि
मेरी हथेली से
सितारों की परछाईं निकली ।
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उस दिन चाँद गगन में था
और चाँदनी धरती पर थी
राते रंगिन इतनी थी कि
मेरी हथेली से
सितारों की परछाईं निकली ।
दीपक आँगन में था
रोशनी जमीन पर थी
जिसे मैं जीवन भर दिवाली
समझ कर खुश होता रहा
वो तो साली होली निकली।
रोशनी जमीन पर थी
जिसे मैं जीवन भर दिवाली
समझ कर खुश होता रहा
वो तो साली होली निकली।
जिन्दगी ने ठुकराया मुझे
फिर भी मैं वक्त बेवक्त
जिन्दगी से मिलने आया
हाथ पकड कर जिन्दगी का
जिन्दगी में ले आता
परन
मेरे हथेली में ऐसी कोई
रेखा ही नहीं निकली।
फिर भी मैं वक्त बेवक्त
जिन्दगी से मिलने आया
हाथ पकड कर जिन्दगी का
जिन्दगी में ले आता
परन
मेरे हथेली में ऐसी कोई
रेखा ही नहीं निकली।
कंगना पहना के बिन्दियां सजा के
आँखों के सागर में डूबकर
होठों से कमल चुराने की आस में
चुटकी भर सुन्दर लिये हाथ में
बाटझोता रहा मांग भरके
मांग पूरी करने को
मगर
वो तो साली बेवफा निकली।
आँखों के सागर में डूबकर
होठों से कमल चुराने की आस में
चुटकी भर सुन्दर लिये हाथ में
बाटझोता रहा मांग भरके
मांग पूरी करने को
मगर
वो तो साली बेवफा निकली।
आँखों की नमी देखकर
जुगनू की चमक फीकी पड़ी
पर शमां रोशन होती रही
परवाने जलते रहे
उफ ! तक
जबां से नहीं निकली।
जुगनू की चमक फीकी पड़ी
पर शमां रोशन होती रही
परवाने जलते रहे
उफ ! तक
जबां से नहीं निकली।
कई मर्तबा मन मचला
फटे हुए पुराने खत पढ़ने को
अब तुम्ही बताओ !
आज क्यों? फिर
हमरी शवांसो में
उनके शवासों की गर्मी निकली।
फटे हुए पुराने खत पढ़ने को
अब तुम्ही बताओ !
आज क्यों? फिर
हमरी शवांसो में
उनके शवासों की गर्मी निकली।
सादर : एस आर मीमरोठ
दिनांक: 04.04.2017
समय 02.40 AM
दिनांक: 04.04.2017
समय 02.40 AM
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