Monday, 18 March 2024

बेआबरु Vs बेरूबरू

दर पर उनके सलामत रही आबरू
दर्द नज्म बना जब लोटे बेरूबरू।
श्यामल निशा में अर्धनिंद स्वपन में
वो आए पर उनसे हुई नहीं गुफ्तगू ।
ख्यालों में जो हमारे सदा सिरमौर रहे
सपनों में तो आए यही हमारी आरजू।
झिझक हमारी हमको झिड़के वर्ना
दिल चाही उनके अंक में दिन भर रहूं।
जादू वाणी में या निगाहों या अदाओं में
भूलने से पहले नाम फिर गुनगुनाऊं ।
कैमिकल लोचा हुआ विचारों में कुछ यूं
विस्मरण से पहले फिर से स्मरण करू।
सादर : शिव राम मीमरोठ
@कॉपी राइट रिजर्व
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