Monday, 18 March 2024

तुम्हारे लिए मर के भी देख लिया

एक रोज रात स्वप्न में हो गया था मै ही स्वर्गवासी
मुझे भा गया प्रकृति का अजूबा अस्थाई स्वर्गप्रवासी
मेरी एक्स X को खबर नहीं,कैसे आती शौक जताने
आपस में हम है दशकों से गुमशुदा हम भये संन्यासी
डबल एक्स मेरी जेड हाजिर हुई पर वो शादीशुदा
दुख उसे भी हुआ इकतरफे प्रेमी जाने का अनायासी
जिस रोज अस्थाई रूप से स्वप्न में स्वर्ग सिधारे हम
अर्धांगनी को हुई ज्यादा बैचेन जो जुड़ी थी हृदयसी
धीरज बंधाने न आए भाई बांधव आए न सहकर्मी
ना सिधारे कोई स्वजन सगे संबंधी जो थे सहोदरसी
मुझे अफसोस न हुआ कोई बाल सखा न खास हुआ
नही कोई हम उम्र युवा सखा जो रोए न बन सियासी
कौन है जो खबर को नही लेगा हवा के झोंके मानद
ना मैं जिंदा किसी से जुड़ा न अस्थाई मुर्दा योमवासी
अब कैसे जोडूं झूठे लोगों से प्रेम, होंके झूठा जुदा
नीद खुली सपना टूटा वापस लौटा घर बन रहवासी
सीख यही मेरी दोस्तों, दोस्त बनाओ,दोस्त बनाओ,
कोई मेरा_अपना दोस्त नहीं जो मिले बाहें भरासी
स्वप्न में मरने पर याद नहीं किया रिश्तेदारोंवफादारों ने
अच्छा होता मेरी एक्स को खबर करता वो गले लगासी
जिन्दे के रिश्ते नाते जिंदे के सगे बने सब कुटुंब कबीला ,
मरने पर याद करेगा दोस्त छबीला जो हो हमगिलासी
सादर : शिव राम मीमरोठ
@कॉपी राइट रिज़र्व

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