Monday, 18 March 2024

आसमां की तपन से

 आसमां की तपन से

सागर नीर
बरखा में बादलों से बरसता है
और
रिश्तों की तपन में
मनप्रेमनीर नयन से झरता है।
कहत शिवराम रिश्तों की
तपन से
मन सागर सम
और
आंख पगली बन
बदली बन जाती है।
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