Monday, 18 March 2024

तुम मुझे अच्छे लगते हो

तुम मुझे अच्छे लगते हो लगेंगे भी
मेरी गलती को नजरंदाज करते हो।
मेरी खामियों में खूबियां ढूंढते हो
ऐसा चमचा हर थाली को पसंद है।
जब ये कानों में मिश्री घोलते है
सभी के चेतन की अचेतन से ईर्ष्या।
अब तो मधुशाला की सांकी चमचा
निज धर्म चमचो का रगड़ते है।
पैंदा थाली का थाली के टूटने तक
अब सॉफ्ट चमचे भी मिलेंगे खूब।
जो मुड़ मुड़ कर झुक झुक कर
सेवा देते है भरी थाली में कटोरी में ।
बाद में यही मधुर सॉफ्ट चमचे
प्लास्टिक के चमचे तो फेंके जाते है।
सड़क पर पड़ोसी की चौखट ओर
मगर हार्ड चमचे को धो के काम लेते।
स्टील चांदी का को मूल्य भाव होता है
इंसानी चमचे वास्तविक चमचे से सीखे।
जो झुका नही मुड़ा नही वो ही सहेजे
वर्ना सॉफ्ट अवसरवादी प्लास्टिक के।
सुंदर सुंदर रंगीन चमचे कबाड़ी के
कबाड़ में धूप सैंकते है तो ठंड सहते है।
चमचागीरी का हुनर गजब है कबसे है
चमचे सकुनी मामा के बिना महाभारत ।
दासी मंथरा के बिना रामायण नही होती
कौन था वो चमचा जिसने कायदे आदम।
जिन्हा को फुसलाया और पाक बनवाया
था कोई जिसने गांधी जी को आमरण।
अनशन पर बिठाके पूनापैक्ट तुड़ाया
वर्ना इंडिया अमरीका से आगे होता।
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