Tuesday, 26 March 2024
होली, तो होली, पर वैसी नहीं हुई! जैसी होनी थीपूनम की रात चांदनी हुई,वैसी नहीं,जैसी होनी थीचांदनी तो थी पूनम की रात में चांद भी था बदलो में होली वो मन से उजली तो थी वैसी नहीं जैसी होनी थीहोली पर रंग में भंग होली, दूध में भांग घोली तो थीमुझे रंग में साना,नजदीकी बढ़ी, वैसे नहीं जैसे होनी थीचेहरा उनका हरा करना था होठ लाल रंग में रगने थेलब लाल किए पर वैसी नहीं जैसे लिपस्टिक से होनी थीशब्द शब्द में रंग घुला उनकें पता नही वो रंगरेज तो नहीखुशी दूरभाष पर बतियाने से मिली वैसे नहीं जैसी होनी थीवो पास खूब बैठते है हमदर्दी बन हमरंगी बन रंगरेजउनके रंग से मेरी रूह रंगी पर जिस्म वैसे नहीं जैसी होनी थीअब होली गई मगर रंग जो बचा रह गया उसे कब लगाहुँमुश्क उनकी इश्क में रंगी तो है पर वैसी नहीं जैसी होनी थीसादर: शिव राम मीमरोठ दुर्गेश@ कॉपी राइट रिजर्व
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment