Monday, 18 March 2024

रिश्तों को निभाने के लिय

 रिश्तों को निभाने के लिय जो जैसा भी सगा संबंधी है

उसकी उसकी मूल प्रवृत्ति में ही स्वीकार करे ,

ऐसा कसने से विवादों, नॉक झोंक से बचा जा सकेगा।

दोस्तों खुले विचार होना जरूरी है
जो जैसा,उसे वैसा ही स्वीकारना है।
मूल रूप में स्वीकार करे सभी को
नमक खारा गुड मीठा ही रहना है
क्यों किसी को बदले अपने अनुसार
मिर्ची को तीखा इमली खट्टा रहनी है
लाखो के सोने , चांदी को छोड़ो
चुटकीभर सिंदूर बिंदी भी गहना है
सर्दी में भी आग सदैव ही गर्म हो
गर्मी में बर्फ को ठंडा ही रहना है
सोचें कभी साथ में बैठके चाय पीले
शिक्षा विहार शिवमार्ग पर ही रहना है

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