हमसे कहे अर्दांगनी तुम समय नही देखते जगह नही देखते
साँझ सवेरे भगवान क्या कहेगा तुम आव ताव नही देखते
कूकर भगोनी डेकची थाली कटोरी क्या ये सब नहीं देखते
पानी का आरओ देखता गीज़र देखता मिक्सी फ्रिज देखता
यूँ प्रेम में मुझे सकुचाते हुए छलनी शर्मायी पर तुम नहीं देखते
ड्राइंग रूम में चाय नस्ता करते हो मेरा पल्लू क्यों पकड़ते हो सोफा हँसता टीवी हंसती हंसे दीवार घड़ी पर तुम नहीं देखते हो
पर्दा करे व्यंग और करे ठिठोली खिड़की दरवाज़े कार्पेट ग़लीचा
झाड़ू झाडे खामियाँ डस्टबीन में डाले डार्लिंग तुम नहीं देखते
मेरे पीछे पीछे साया बनकर हर रोज़ आते हो बाथरूम तक
साबुन चिड़ती सैम्पू ग़ुस्सा करे ईर्ष्या करे टॉवल तुम नहीं देखते
बाहर लिपस्टिक शिकवा करे गिलवा करे मेरी आँख का कजरा मंगलसूत्र तुम्हें खींचता पलक झपकते आते वक्त नहीं देखते
गीले गेसू फ़ेयर लवली लगा अक्स अभी तो बिंदिया सजना बाक़ी
साड़ी पल्लू ठूंसा कमर में गहरी नाभी हर रोज़ नहीं देखते
सुबह के बज गये पौने नौ अपने अपने काम पर जाये हम दोनों
उँगली उलझाओं मत बालों में कंघी का ग़ुस्सा क्यों नहीं देखते
पतिदेव नज़रे तिरछी कर मुझे यूँ घूरना तुम्हारी फ़ितरत है आदत
आईना दर्पण सीसा सब में तेरे मन में तेरे दिल में क्यों नहीं देखते
पहले हुआ शाम का खाना फिर टीवी में देखा प्रेम मिलन का गाना
तुम पीते गर्म दूध गिलास बदलते हुए मुझे लिबास नहीं देखते
लैटे तो स्लिपवैल का गद्दा ओढ़े तो मख़मली नर्म राजाई जयपुरी श्यनकक्ष का प्रेम हो या हो कुरुक्षेत्र युद्ध दोनों नियम नहीं देखते
सादर: शिव राम मीमरोठ
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