Monday, 6 January 2020

महाभारत के सात कारण V/s युगों की वसीयत

महाभारत के सात कारण V/s  युगों की वसीयत
दोस्तों !...... दोस्तों !... दोस्तों !...
दोष देना बंद करो
हमरे भारतवर्ष  को , दोस्तों
हमरे हिंदुस्तान को हिंदुस्तनियों
इसे तो, हमें तो, हमरे इंडिया को
सब वशीयत में मिला  है हमको !
हस्थीनापुर , आर्यावर्त  और इन्द्रप्रस्थ से,
 दिल्ली सी संसद और दुशासन से दागी सांसद
और महारथी कर्ण से मूक बधिर महामंत्री  
सब वशीयत में मिला  है !
पितामह  भीष्म सा समर्पित राष्ट्नायक राष्टपति
मामा शकुनी सा शुभचिंतक महामहिम राज्यपाल
वसीयत में मिले मिले पडोसी और पड़ोसन
पाक चाइना बन क्र जन्मे जयद्रथ जरासंध्र  
समाजिक और राजनितिक कमजोरियां, 
व्यक्तिगत बुराइयें, पौराणिक प्रथाएं,
अन्धविश्वास एवं फर्क की राजनीति ।

अग्रज धृतराष्ट की जन्मांधता
बाहर और भीतर से,
 दोनों तरह से : तन से और मन से अंधता,
आँखों से तो था ही अँधा,
परन्तु था मन से भी अँधा
अंधे की आँखों में चमक थी की येन केन प्रकारेण
पुत्र दुर्योधन बने राजा !
आज भी घर समाज और राजनीती में प्रचलित हैं,
यही वंशवाद परम्परा भी थी
पहला कारण महाभारत का।


कुंती का चाल चलन,
ऋषि दुर्वासा का वरदान
सूर्य संग गुप्तगुं जो की लडकपन में
कर्ण के रूप सूर्य की धुप में,
 नदीं में बहा दी ममता,
फिर भी कहलाई राजमाता!
आँचल के दाग छुपाने में माहिर पृथा,
 बेदाग आँचल बचा न सकी पांचाली का
कुंती बेबस थी खुद का दामन थामने मे,
जो खोल देती राज राजमाता राजसभा में,
पुत्र कर्ण !
तुम पांडवों में श्रेष्ठ हो,
पांचाली द्रोपदी के जेष्ठ हो !
 कसम ! क़ायनात की
छूआ भी जो  आँचल कुलवधू का,
कर्ण के हाथों,
कौरव राजसभा में धुर्योधन के चीथड़े चीथड़े होते ,
 कुंती का यूँ मौन रहना, द्रोपदी का अपमान होना भी था
दूसरा कारण महाभारत का,

वंशवाद -जेष्ठता, पराक्रम से                                                                                                                   मूल रूप से  वास्तविक उत्तराधिकारी था,
आर्य  कुल का , हस्तिनापुर का
माहरथी कर्ण !
परन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनाना
महात्मा व्यास का ,
जननी राजमाता कुंती का
वयोवृद्ध पितामह भीष्म का
धर्मरक्षक वासुदेव का
 यूँ तथ्यों को नजर अंदाज करके योग्यता गला घोटना    
 सभस्थलों में कर्ण का अनादर करना या देखना भी था
तीसरा कारण महाभारत का।


गंगा पुत्र देवव्रत का आजीवन ब्रह्र्चार्य व्रत की
भीष्म प्रतिज्ञा महज सफलता भर थी         
 पितामह भीष्म की नपुसंकता छुपाने की और
मान सम्मान और प्रतिष्ठा
Modern “Protocol"
पाने की थोथी चाह में / लालच में
आर्यव्रत के  सभास्थलों में
दुराचारी व्यभिचारी अत्याचारी दुर्योधन के  
अत्याचारों को खुली आँखों से देख के भी
 भीष्म का संजीदा गूंगापन, मुकदर्शिता,हठता भी थी
चौथा कारण माहभारत का


दो नावों में तैरने की पारंगतता
तराजू के दोनों पलड़ों में बाँट रखने में विख्यात
सम्पूर्ण आर्याव्रत का गुरु, कौरव पांडवों का कुलगुरू
 आचार्य द्रोण, गुरुद्रोण का दोगलापन
प्रेम अर्जुन से एवम पक्ष कौरवों का
सदैव  ही सभास्थलों और युद्धस्थलों में
राजगुरु में  शिष्य प्रेम से ज्यादा पुत्र मोह
पुत्र अशवस्थामा का मित्र मोह ने दुर्योधन को सम्बल दिया
राष्टीय पथप्रदर्शक की नैतिक पंगुता भी थी
पांचवा कारण महाभारत का

रूप सुन्दरी स्वप्न सुन्दरी क्षत्राणी कर्ण की पत्नी की देवरानी ने  
स्वंवर में महारथी कर्ण को अक्षत्रि कह के
रोक दिया था प्रतिंच्या चढाने से धनुष पर
चिन्ह जो बने थे प्रतिंच्या से उँगलियों में,
पांचाली के नस्तर से शब्द पर निकल गये पर  दिल के
गुस्से में लाल पिला हो के, कर्ण बहार निकल गया महफ़िल के,
राधा पुत्र महारथी अंगराज के जख्म थे  अभी हरे के हरे
वक्त ढंग से मलहम लगता पर वक्त को भी वक्त कम मिला
और
युधिष्ठर ने राजभिषेक के लिए भीष्म व्यास द्रौण दुर्योधन कर्ण को
इन्द्रप्रस्थ उत्सव का न्योता जो भेजा,
साज सज्जा और असबाब ले युवराज जा धमका
चाँद की चांदनी में महल के जलाशय को समझा  संगमरमर की फर्स
जलमग्न हुए युवराज दुर्योधन के उघड जो गये राजसी वस्त्र
जलमग्न दुर्योधन जलाशय में बेहाल देखके, कर्ण की भ्रकुटी कुछ  यूँ तनी की
देखता हैं  ! जलाशय स्वंवरसा जलपात्र और
समय का धूमता पहिये पर दुर्योधन सी मछली
आव देखा न, तांव देखा इन्द्रप्रस्थ की कुलवधू ने,  
समझे बिना ही नजरों की नजाकत
 अंधे का अँधा हस्तिनापुर युवराज को कह डाला  ,
जल से जल्लाद सा गरजा दुर्योधन मित्र, कर्ण !
मुद्दा राज का नही, साम्राज्य का नही अब तो दोस्त !  
मसला  ! जर का नही, जोरू का नही, दोस्त, जमीं का भी नही 
अस्त्रों का नही, शस्त्रों का नही दोस्त  ! ,
मुद्दा  मेरे राजसी वस्त्र का है,मुद्दा वस्त्रों का हैं !
मैं लूँगा बदला वस्त्रों का वस्त्रों से........     
इद्र्प्रस्थ उत्सव में द्रोपदी के ये तीखे बोल भी थे
छ्ठा कारण महाभारत का।

कृष्ण की विद्वता, सहजता, अलौकिकता, धर्मपरायणता
कृष्ण ! अर्जुन का  दोस्त सगा और सलाकार भी था
कुंती का खास भतीजा होना उसकी भी कमजोरी थी,  
अर्जुन की इकलोती पत्नी अभिमन्यु की माँ “ सुभद्रा ”
दूरदराज से नही थीं वो, कृष्ण कुल के  यादवों की छोरी थी 
इतना सब कुछ जन बुझ कर, क्यों अनजान बने रहे कान्हां  ?
क्यां भारी था, अलौकिक सुदर्शन पर लौकिक दुर्योधन ?
गर्दन काट फेंकता कब का, पर वो तो विधाता था  ?  
“ राधा ने कसम जो कान्हा को दिलवायीं  “
इन उँगलियों से बंसी की मधुर धुन सुन के
मथुरा वृन्दावन,बाल गोपाल गोपियाँ, मन्त्र मुग्ध कियें  
जिन उँगलियों पर, गोवर्धन धरा और जनता को इंद्र से भय मुक्त किया
जो हाथ प्यार के हैं, उन हाथों में कभी तुम ,
अपने हाथों में कान्हा, अस्त्र –सस्त्र मत लेना, विध्वंस कभी मत करना
जब जब पाप बढ़े दुनिया में, आपस में विध्वंस भलाई करवा देना,
 कान्हा, अपने हाथों में अस्त्र –सस्त्र मत लेना, चाहे आफत कितनी आयें
जोरी से कोई वार करे, वार बचाके भग जाना,दूर कहीं छुप जाना
लोग भलाई रणछोड़ कहे, अजी कहते रहे ,दूर सुरक्षित भग जाना
मेरे कान्हा, हाथों में अस्त्र –सस्त्र मत लेना,
विपदा कोई और बड़ी सी / भी आजायें,
गोकुल छोड़ो, मथुरा छोड़ो , चाहे छोड़ो वृदावन दूर कहीं चले जाना
राधा ! मैं वादा करता हूँ अस्त्र सस्त्र नही छुहुंगा
जरूरत पड़ी तो रण में भी रणछोड़ के भग लूँगा, पर अस्त्र सस्त्र नही छुहुंगा
चाहे रणछोड़ कहलाऊंगा,
पूर्व के गोकुल,मथुरा, वृदावन छोड़के पश्चिम में दूर द्वारका बसाऊंगा  .
 जो कान्हा ने स्वीकारी , राधा की वो मदुर कसम भी थी
सातवां कारण महाभारत का.
सादर : शिव राम मीमरोठ 

Sunday, 5 January 2020

शब्द सुंदर होने चाहिए

चेहरा सुंदर हो या, बदसूरत हो
अपुनः के बस की बात नही।
 पर मन सुंदर होना चाहिये, 
 मन का सुंदर होना बस में हैं ।
होठो पर अल्फाज अच्छे हो!
दिल का सुंदर होना बस में हैं
दिल के ख्याल, मन के अल्फाज
लिये शब्द सुंदर होने चाहिये।
ओ मेरे हमनजीर
 लोग चेहरे भूल जाते हैं
शब्दों को कभी नहीं

" दीपावली "

"  दीपावली  "

सुन  शिवराम ज़रा
इक बात हमारी,
 यह दीपावली नहीं ,
कोई प्रथा निराली.......... (1)

यह तो  हैं वहीं पुरानी,
अमीरों के घर, ज़शन मने,
मधुमेही के घर बटे मिठाई 🍩 ,,
बहरे घर खुब चले पटाखे
काने के आँगन मे मोमबत्तियां जले,
दिवाली नहीं,
कोई प्रथा निराली ..................(2)

मगर,
भुलोमत मेरे देशवासियों,
 देश मे ऐसे भी ,
वंचित भी हैं,
जो मुश्किल से दीपक जला पाते हैं,
सोचके कि तेल तो,
कल सबजी मे काम आयेगा,
मुन्रा बाळो मे लगा लेगा,
वह  इसकुल चला जायेगा,
यह तो वही  दिवाली हैं, पुरानी ..........(3)

हताश  निराश  बहुतेरे,
खाली पेट भी,
सो गये होंगे,
 इस महान देश में,
आज भी देखे हैं,
मैं ने ,
भास्कर चौराहा पर,
गुलाबी शहर में,
 लाल बत्ती पर भीख मांगते,
बच्चों को,
चेहरे से दिवाली गैरहाजिर थी ...................(4)

ऐ " शिवराम ”
कोन बताएं उन्हें,
कि आज झूठी दिवाली हैं,
जबतलक हर पेट को रोटी,
ना मिले,
जबतलक हर तन को कपड़ा,
ना मिले,
जबतलक हर सिर को छत,
ना मिले,
बेमानी हैं, आर्यावर्त  की दिवाली.............(5)

आज हर  आर्य  की हैं,
अभिलाषा
 लक्षमी को घर बुलाने को,
मगर,
लक्षमी जी  का वाहन 🚗,
उल्रलु हैं,
 जो अंधेरे मे  चलता हैं,
उजाला से डरता 😱 हैं,
जलते दीपक की रोशनी,
खाली ही रह जाता हैं,
लक्षमी का आसन,
उल्रलु अंधेरे की ओर ले उड़ान भर जाता हैं,
जिन बस्तियों में गरीबीवश,
दीपक नहीं जल पाये ..................(6)।
,
सादर : शिवराम मीमरोठ

लोग कहते है हम मिलनसार नहीं,

लोग कहते है हम मिलनसार नहीं,
हमसे तहेदिल से मिलते तो है सभी
नजरों के सहारे जो हलक में उतरे
नजर ऐसा चेहरा अब आता ही नहीं ------- (१)

हमें तो लोग गलत मानते हैं यूँ ही
हम ना कल गलत थे, ना आज हैं,
हम तो आदतन मान लेते है गलती ,
ताकि आपसे बना रहे युँ ही रिस्ते नाते-------(२)

ये तो हम हैं जो नकाब लगते नहीं,
💘 के खयाल तुमसे छिपाते नहीं
वर्ना लोग तो बीबी के पीठ पीछे
दिन में तीन दफा बदलते हैं विग----(३)

From : शिवराम मीमरोठ

" चलो हम भी जी ले ते हैं। "

" चलो हम भी जी ले  ते हैं। "

पीने का मन करता है
 तो पी लेता हूँ
फटी जिदंगी को
 सपनों के धागे से सिल लेता हूँ।

अब तलक कष्ट  काटें हैं,
कष्ट काटने की आदत सी  हैं,
न तो चाहत बची कुछ पाने की,
ना उमंग बची अब मन,
हम तो
ऐसे ही जी लेता हु।

मैं  रम पी लु या
अपना गम पी लू,
अक़सो पर खुशक अशकों , को
चखने से, बेहतर होगा
मैं
 " शिवराम" जरा सी
 मधिरा पी लु ।

कया रखा  हैं,
इस अपमानजनक दुनिया मे,
में  जरा सी,
इजजत पाने को,
कु  ना मैं,
थोड़ा  सा सोमरस पी लु ।

खाली खाली  बचपन बीता,
खाली  बीता यौवन,
खालीपन को भरने को,
 ऐ " शिवराम" चले
बचचन की" मधुशाला"
मे
इक घूंट मधु पी  लु ।

सादर : शिवराम मीमरोठ

" 2020 का भारत "

" 2020 का भारत "

एक
सपना देखा करते थे,
हमारे परम प्रिय " राष्ट्रपति "
APJ Kalam साहब,
सपना   !
2020 का भारत !
लेकिन, मुझे झकझोर दिया,
इक छोटे से सवाल ने,
     " हम सहायक है  या बाधक"

सपना तो नेताजी ने भी देखा था!
चंद्रशेखर आजाद के
आजाद भारत का ,
कसम ,
भगत सिंह के " इंकलाब" की
भारत आज भी " आजाद " सा,
नजर ही नहीं आता  !

शिकांगो धर्म संसद मे,
क्या क्या बोला था,
भारत का " विवेक" आनंद 😂 से
विवेकानन्द ने !
लगता तो है,
कहीं ,
आजाद भारत का विवेक देखने,
कलाम साहब के भेष मे,
आनंद की  चाह में,
विवेकानन्द ही तो नहीं  आगये ।

शायद हमसे भूल हो गईं हैं,
पहचानने में,
विदेशियों ने सही सही पहचाना हैं,
कलाम साहब को,
तभी तो जनमदिवस को,
उस दिन  को
UNO ने
" टीचर  दिवस "  मनाया है।

मगर,
 यक्ष प्रशन तो यह,
कि हम सहायक है या बाधक,
सवाल तो , अपने आपसे हैं,
हमारे बहुतेरे साथी,
जीवनपर्यंत ही " पुलिंग - पुशिंग ,
हम वयस्त रहे यूही
" लैग पुलिंग में"
या फिर फैश पुशिग मे।

सादर : शिवराम मीमरोठ

" मन की बात "

" मन  की  बात  "

लोग कहते हैं कि आज है,
 १४ जनवरी,
  आज है  मळ मास का अंत ,,
केवल मळ मास का ही तो अंत है,
मन के मळ नहीं,
हर साल मन का मळ बढ़ा रहे हैं, हम,
क्योकि
आर्यावर्त  में  पूजय हैं आसाराम संत ।

भारत की  तो छोड़ो बातें,
महाभारत  की कर लेते हैं
तीन तीन बहनों का अपहृता,
भीष्म, भ्रम , गंगा पुत्र, देवव्रत,
अनब्याहा पितामह कहलाता हैं ,
मळ मास में ही हुआ था उसका अंत।

सूर्य देव के उत्तरायण होने पर भारत  में,
 उजाले / बृद्धि का प्रतीक पर्व
"मकरसंक्रांति" को ही भीष्म ने,
त्यागी थी, देह !
इच्छामृत्यु वरदान पाकर भी न कर सका,
मन का मळ का अंत।

साल में  ३६४ दिन करते हैं,
बुरे कर्म करते हैं,  पापि, अन्ययी,
देखो तो सही,
तीन सौ पैसठवें
" केवल एक दिन में ही "
 चाहते हैं धोने तन, मन का मळ।

जब तलक नही धुलेगा,
मजदूर से पी एम,
मन का मळ,
नहीं रूकेगें दुराचार, अत्याचार,
भ्रष्टाचार,
रूखा मन की झूठी बातों से।

कुछ फर्क नहीं  पड़ेगा " शिवराम"
नोट 📝 बंदी से,
वोट बंदी से,
रोड बंद से,
पार्लियामेंट बंदी से,
आर्थिक मंदी से,
जबतलक नहीं करेंगे
मन के मळ का अंत।

सादर : शिवराम मीमरोठ

" What is Life ? "

" What is Life ? "

Think & understood,
Life is flower or fade
Its maximum portion depends on you
and
Its minor depends on your surrounds cells.

Although,
Regarding yours surrounding cells,
Again also ,
Its maximum portion depends on ,
Your selection ,
and
Its minor depends on your election.

Whilst your selection or election,
Selection is totally depends
On your desire & ambitions,
Or
Election is absolutely depends
On organization behavior,
On society custom & culture.

At last we should accept,
At least minimum guiltiness of us,
Instead of doggedness,
That the GOD is responsible for us all failure,
In the context delivered by Loard Krishna to Arjun
In the KURUKSHETRA battle field in GITA.

From : शिवराम मीमरोठ

Dear friends,

Dear friends,

In general every men are told that purity should be maintain in life, its useful , but in my opinion 100 % purity in any substance physically or in virtual world.

When the Gold is pure its useless for human life, because pure gold never used in an ornaments due to softness of its, for enabling its to fabricating or molding of ornaments some others materials must adding to improving hardness, without changing of colour appearance for better eye appeal for user, specially for women.

Even the water also never used in its pure condition, because of our body demanding some minerals and we can getting its through water as in natural form. if i talking about pure water means distilled water, which we find through steam condensation only, its often useful in research work, not in drinking purpose for live elements. Some drinking water selling companies are display or showing advertisements to more mineral add water i.e impure water for better health.

At now we are discussing of human behavior is also follow the nature of substance, impurities is needed to maintain good relation in modern society i.e if anyone asking or telling clearly, plain truth, none of like listen him in well manner, even someone quarrel with speaker or not give attention , because of plain truth not like by general man. So at last normal man try to twist the thing or matter with some adding some impurities by adding additional wrong facts or by hiding some truth facts, both are harmful for human being , but average man reminiscent of its.
       
In broad view if someone think about citizenship regarding purity or impurities. Pure men means only and only originator of defined land area reaming all type citizens are impurities. If we are discussed in concern of some specific country likes Pakistan, India and United state of America (USA) that the one thing comes into light the two type of social strata are in existence fertilized Vs Shekhpathan, originator Vs outsider and black and white person respectively.

If someone average or normal man try to made himself unknown, I saying to  more wisdom man or nock the door of philosopher in broad view of whole world that the …………………….

Contd…………………..

From : शिवराम मीमरोठ

Instant thought " .

" Instant thought " .

Once upon a time i thinking the women is greater art of world, when i was unmarried.                                                                                            But after marriage i have learnt that the women is dangerous weapon of world,  which firstly attack on roots of social relation and hereafter on family members like a sweet poison.

From : शिवराम मीमरोठ

Lovely Love "

"  Lovely Love "

life of love is few times,
and life of loves is few years,
life of love some months,
even only love live numbers of days,
because of LOVE  socides,
when two opposite gender,
enter into each others,
this time LOVE is MARTYR,
               and
after suicides of LOVE ,
BOTH gender ignore each others,
and treated like a disposable cup of tea,
they appear just as western,
and
they react alike
use & throw,
 till again love come in conscious.

From शिवराम मीमरोठ

लोग तिरंगे के नीचे "

" लोग तिरंगे के नीचे "

लोग तिरंगे के नीचे
सावधान खडे होके
बयां करते हैं,
पूर्वजों के चरित्र को,
शहीदों की शहादत को
 केवल साल मे दो  दिन
शैष दिनों  में  भूल जाते हैं,
वतन  तक को,
व्यस्त हो जीविकोपार्जन की आढ में
स्वार्थ सिद्धि में
या फिर अनैतिकता में, अत्याचारों में
झूठी कसमें भी वतन की खाते
मनोरंजनी देशभक्ति के गीत गाते
दिन हो या रात 🌃 में
घर में  या दफ्तर में
बाज़ार में, नहीं तो मेले  में
रिश्वतखोर , रिश्वत लेते।

ये सौदेबाज़  है चूकते नहीं,
कतई
वतन की सौदेबाजी से ,
बहुत माहिर
हो चुके हैं ,
 सौदेबाजी को वफादारी का नकाबपोशी
करके्
वाहवाही लूटते  में
बेचते हैं सरकारी फैक्टरी को,
 2G, 3G, 4G स्पक्ट्रम को,
रिफायनरी पैट्रोलियम को,
माइन्स को, सेज की लैन्ड को,
को बेच लेते हैं

सादर: शिवराम मीमरोठ

Aim of life

Aim of life

1) Self happiness without made others unhappy.
Mentally and Physically sex is top most need of spinster or married person and its always legal , if a couple mutually agree. Here no matter of cast basis, religious basis and marriage basis boundary.  No matter before marriage sex or afterwards sex other else life partner provided parent & spouse not made unhappy.

2) Better healthcare.
Its doesn't matter your vegetarian or non vegetarian. Non vegetarian means those habitats having eyes and bones , other than else all food are vegetarian.

3) Better education .
Education made man capable to controlling mentally and physically hungriness and to delivering more and more happiness to human being.

From :  शिवराम मीमरोठ

" simple Life"

"  simple Life"

(1) Food :
 All habitat which having eyes 👀 and bones is non vegetarian food  other than else all of vegetarian food.

(2) God :
God means a spectrum of lights other than else a supreme personality which neither born as by product of sexual action  of parent nor involving himself in sexual action for growth of generation.

From :  शिवराम मीमरोठ

हम दुनिया को समझा नहीं पाये,

दुनिया हमको समझ गयी हम दुनिया को समझा नहीं पाये,
महनतकश हैं , ईमानदार है हम , निठल्ले इतनसा समझ  नहीं पाये---(१)

झूठी कसमें खाने वाले , झूठा पानी पीने वाले अब  तुम्हारा
मान नहीं, सम्मान नही बिन ईज्जत  के तुम मन दर्पण में कैसे  जी पाये ----(२)

चंद रूपये की लालच मे  पहरेदार लूटरे क्यों बन बैठे,
ईमानदारी की पहेलियाँ  युवा क्यो नहीं समझ पाये----(३)

अदब से कुर्सी पर बैठे सरकारी मुर्दे मुद्रा की मुद्रा  में,
मुफ्त के शमशान मे खुद की अर्थी को उजाला दिखाने चिगांरी ढुढंते हैं

पहली मुलाकात मे उन्हें देखकर लगा था कि कोई हिन्दुस्तानी मर्द हैं,
 अंदाज ए बयाँ जब देखा उनका तो हम समझे कि ये तो पाकिस्तानी नामर्द हैं।

भगवान उर्जा का स्वरुप है ।


भगवान उर्जा    का  स्वरुप है ।
अत उर्जा क तरह भगवान न तो  पैदा होते है,  न ह कभी  मरते हैं।

जिसने माँ के पेट से जन्म लिया हो , बाद मर गया हो, बीच में शादी करके बच्चे पैदा किये हो, वह भगवान हो ही
नहीं सकता ।

वे केवल पुज्यनिय तो सकते हैं,  ए पी जो कलाम सहाब, गाँधी जी, बी आर अंबेडकर तथा मदर टरेसा की तरह।

श्री राम,  कृष्ण,   शिव,  इसा,  मुहम्मद, गुरु नानक जी,  बुद्ध तथा महावीर जैन इत्यादि आचार्यों / महापुरुषों को शिवराम मिमरोठ का सत सत नमन ।

सादर : शिवराम मीमरोठ

"होली है जी होली"


        "होली है जी  होली"
-------------------------------------
कहत शिवराम सुनो साथियों
समय कम है हाथ बांटियों
ये होली तो एकदम पोळी हैं,
 बताओ कहा सॅालिड हैं होली?
अब जहाँ मे दोस्त  मिलते नहीं,
पहले  जैसे
जो प्रगति  में साथ दे ,
बनके घोड़ा 🐴 - हाथी
विपत्ती के अंधेरे मे राह बताएं
 बनके दीपक -बाती ----------

भाइयों, बहनों , मित्रों -सज्जनों,
उल्लझनों में उलझा युँ
शिवराम मीमरोठ
किसके  रंग 🎨 लगाये  होली में,
  आँचल में  लगाये  या
लगाये किसी की झोली में,
रंग बिरंगे रंगो से ,
आजतलक भरा है ये,
प्रेम रंग से लबालब
ये  जीवन पिटारा ----------

कब  कब कहां कहां कैसे कैसे ?
किस किसको रंगे ?
कौनसा कौनसा रंग लगाये ?
मन करत है म्हारा,
 काँहा की तरह,
अपनी राधा को,
  अपने जीवनसाथी को
    रंग लगाये हाथों से गालों पर ------

  या-----या,,,,,,,,,, या फिर
पिचकारी से,
पिछे से, बाजु से,
 छुपके से ,
सीने  पे लगाये रंग,
बृज के बाल ग्वालों सा
मगर
पिचकारी से रंग लगाना,
तो लगा ऐसा जैसा कि
 रिमोट से टीवी 📺 चलाना --------

या------या---------या
चाहते  तो   हैं हम भी ,
चाहते तो हैं वो भी हैं
होली के बहाने रंग 🎨  लगाना
अपने मन से उनके मन को
 आत्मियता का,
अपनत्व  रोग लगाना,
मगर उन पर तो चढ़ा हुआ हैं,
 रंग पहले से,
तन पर भौतिकता का,
मन पर स्वार्थवादिता का,
यक्ष प्रश्न  तो अभी भी जिन्दा हैं ।
 किसके पास बचा हैं रंग
निस्वार्थ स्नेह समर्पण का---------९

रंग मोहब्बत का लगाये,
तो डर लगता हैं,
मोहब्बत तो बढायेगी आसक्ति ,
मोहब्बत में,
तन का तन से मिलन रोक पाये
युवकों के मन में नहीं हैं,
अब वो मर्यदा पालन की शक्ति
सम्भल कर चयन करो,
 उन हाथों का,
जो रंग बदल दे  गालों का-----

जब जब  रंग बिखेरा
मिल बैठे आपस में
रूखे मन से रुखापन का,
तब से अबतलक,
पता  नहीं कबतलक
मन की मन से
तन की तन से दूरी  रहेगी,
कुछ हुआ नहीं,
 मन मंथन  से ,
उल्टे चिंतन से चिंतित हुए
फेर बढी वैचारिक ईष्या  ----

पवित्र रुह से,
सच्चे मन से  ,
पूर्ण समर्पणता से
प्रेम रंग में रंगा हुआ
हिरन मारन  राम भगा,
हिरनाकस्प मारन  कारण,
खम्ब  तोड कर नृसिंहा भया,
प्रहलाद बचा पर होली तो जली,
फिर भीपरन पाप  जला नहीं  मन का
तन पर झुठा  रंग लगाने से--------

यार लगाए यारी का रंग,
माँ बाप लगाये ममता का रंग,
भैया भाभी बहन लगाये,
 खुशियों का रंग,
रंग लगाये जीवन नैयाका - जीवनसाथी,
भूले बिसरे दोस्त लगाये
बचपन का रंग --------

अब ना लगाये कोई हमें,
 जिस्मानी रंग,
वो बात गई,
 वो रात रात गईं,
गैरों के आशियाने मे सजने सँवरने
बिन दुल्हा- दुल्हन बारात गईं  सपनों की,
 हमरे अरमानों की खेप गई
 लावरिश बाजारों में -------

सादर : शिवराम मीमरोठ
From : Shiv Ram Meemroth

आज का समय

आज का समय
......................................
अक्सर  जहन में इक विचार
बार बार आता  हैं
इस जहाँ में तीन लोग रहते हैं
इक घर 🏠 गृहस्थी
दूजा चिर कँवारा सन्यासी
बात काम की इक और सुनो
तिजा अघोषित भगोड़ा।

शादी करली  जिसने समय पर
वो सोचते हैं कि वो ही
 बुद्धिमान है जहाँ में
अरे भई फस चुके हैं वो मोह जाल में
सारे कानून बने
 उनके पालन के लिए
सौ टैक्स रोज के भरते बेरोजगार
अोर सोचते हैं जिन्दगी बीत रही है
मजे से आधा पेट भरते भरते ।

जो रह गये चिर कँवारे
👓 चश्मा तक नहीं लगाते
सार्वजनिक जगहों पर घूरती नजरों से
नजारों की नजाकत लेते हुए
 कोई मठ में मठाधीश बन बैठा
किसी धाम  में  मंहत बन बैठे
आश्रम में गद्दी पर पदासीन हो कर
बौद्ध भिक्षु दलाई लामा बन बैठे
राज योग हुआ तो राजगद्दी पर सी एम बन बैठेंगे,
मैथस् पढ़ी हैं उन्होंने कैरियर बना लिया हैं
 गुणा बढ़ाये, भाग को देखा ,
जो पसन्द  नहीं आया,माईनस कर दिया
 योग  ज्यादा किये तो  योगी कहलाऐं ।

घोडे भी नहीं दौडे तिसरे इतनी तेजी से दौड़े
अग्नी के समक्ष सात फेरे लेके
 जीवन परीक्षा में जो फेल होके
 पत्नी को छोड़के भागे भगोड़े
कई सफल साधु  बने फिरे तो
कई सफल राजनेता बन बैठे
कब किस के भाग्य 🌠 ने पलटी मारी
टळ गये अटल , उडनछुं हुए अडनछूं
जब पासा भाग्य ने सियासी पलटा
जननायक ,लोकनायक,जनमान्य
सर्वप्रिय राष्ट्रनायक बन बैठे।

सादर : शिवराम मीमरोठ

" ताजपोशी""""

" ताजपोशी""""

चाहे कोई मुझको भडवा कहे,
अजी  जोर लगाके  कहता रहे
में ब्याह करलु तो क्या हुआ ?
मन से कँवारा बनके,
पहन के चढ्रढी,
सड़कों पर घूमु,
ये मेरी मर्जी ।

जो  कहना तुम कहते रहो,
मुझे चाह लगी हैं सत्ता की,
मुझे शाह मिली हैं अमिट की
फिर भला में  क्यों ना मिटा दु,
हर अडनी वाली वाणी को,
कोन कहता है,
 याददाश्त मेरी कमजोर है, म्हरी
अभी तो
स्मृती म्हारी  अच्छी है,
इतिहास भला  नहीं पढ़ा  हमने
पर राजनीति तो अच्छी है।

मन हुआ मुलायम जब से,
मोह - माया का संकट दूर हुआ दिल से,
व्हीकल व्हीकल चिल्लाने वाले,
बस व्हीकल पाकर खुश हुए,
बिन रफ्तार बढ़ाये व्रहीकल की
अपने कदमो पर जिन्हें विश्वास नहीं
वाले
वो  खटियाँ पर जा बैठे,
 आरामपरस्ती खटियाँ  पर ,
सुस्ता ने की खँवाहिश में,
युवराजों के चेहरे अ-खिले-से रह गये,

उधर देखलो खूसट बाबा ,,
नागार्जुन सा दिखने वाला ,
इक नागा,
कंकर कंकर शंकर शंकर
कहते कहते काशी में ,
बिना गंगा को साफ किये,
पुष्प खिला के कीचड़ में,
खुद इन्दप्रस्थ के  सिंहासन पर,
 धर्मराज बन बैठा।

उम्र गुजराती जाये पप्पु
अब कुछ मिठा हो जाये,
 अरे काहे का मीठा,
मन के लाखों खण्ड हुए,
इक मणिपुर में ध्वस्त हुआ,
दूजा गोवा में गिरा,
शैष बचे टुकड़े  खडिंत हुए,
उत्तराखण्ड यु पी मलियामेट हुए।

सादर : शिवराम मीमरोठ

इण्डिया में intolerance बढ रही हैं,

अमिर ने  कहा,
 इण्डिया में intolerance  बढ रही हैं,
गरीब ने कहा हमें सहन करने की
आदत लग रही हैं।

रईस में रईस SRK ने कहा,झ
कोई भी धंधा छोटा नहीं होता,
धंधा करने में  कोई हर्ज  नहीं
जबतलक उससे किसी का नुकसान
नहीं होता
फकीर ने कहा,
मियाँ अौर कितने पाकिस्तान बनाने हैं।

बुजुर्ग कहते थे,
मोहब्बत में  अौर महाभारत में
सब कुछ जायज़ है,
शिवराम कहें सुन मीमरोठ
शिक्षा रोटी अोर दवाई बाबत में
 सब जायज़ हैं,

भैया बहनों अौर मित्रों
कहता हूँ मैं लाल किला 🏰 की
प्राचिरों से,
साम दाम दण्ड भेद  अलावा
राजनीति में सब नाजायज़ हैं
हर बड़े चुनावी से पहले
नोट  बंदी भी जायज़ हैं
कालाधन खत्म करने का इक अौर
माकूल तरीका हैं
2019 के आम चुनावों से पहले
Rs. 2000 का नोट बंद करना
कतई लाजिमी हैं।

सादर : शिवराम मीमरोठ।

" Dear Happy "

"   Dear Happy  "

Dear Happy,

come on, i like you,                                 
 
in day time only............................. ,
                                                                                                                   
every where
                                                                                               
but sorry,
                                                                                                                           I want KHUSHI more than you...............................,       
                                                                 
     and       
                                                                                       
       I love SHANTI whole night, 

Till morning.................................

   in deep darknes,                       
                                                                 
   along with support of barley water,           
                                                                                                                   with sweet, hot & breathing......................

     DEAR FRIENDS IS ONLY AND ONLY TRUTH,

 WHICH MAKE WAY OF "Moksha"         
                                                                                   
              in living world.

FROM : Shiv Ram Meemroth

" 1st Love "

"     1st Love "
First Love gift of God,
First love need of heart,
Is only and only love
No more love in world.......(1)

First Love is Love ,
Second love and onward,
Only practice match
On different pitch with several ball
With old bat. Realy......Realy......... (2)

From : शिवराम मीमरोठ

हमने उसको छोड़ था

हमने उसको छोड़ था
या उसने ही हमको छोड़ दिया
 कशमकश में नक्शा बदल गया जिनदगी का
 बालकोंनी शैष रह गईं।

महल बनाया सपनों का
साथ ले कर अपने का
मोहब्बत के आँधियाँ में
वो नीव की बन गये
 मैं कँगुरा  शैष रह गये।

हिमालय सी ख्वाहिशें दिल 💘 में
रख कर
 हम अमरकण्टक सा रह गये
पर मिसाल ए मोहब्बत वो
मन्दाकनी, भागीरथी
नर्मदा बन कर
मेरे मन के हर कंकर को
समझ के शंकर
आँसुओं मे भिगो गई।

सादर: शिवराम मीमरोठ

Old is Gold

Old is Gold
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इन आँखों से हमें
सब कुछ नया  नया अौर युवा युवा
अच्छा लगता हैं
जो दिखता है जमाने में
मगर  भूल गये हम
क्यों
बुजुर्गो की कहवत :
नयाँ नो दिन- पुराना सौ दिन
  " Old is Gold "
" Old is Gold "

कहे शिवराम सुन मीमरोठ
 अगर मगर छोड दो
बस इतना तो सब मानते हैं
 परियों - देवियों
अखबार और मोबाइल के
नये एडिसन सदैव सबके
मन को भाते हैं ,
अपनों से ज्यादा तो इन्हें पराये लोग
 चाहते हैं।

जब इनका रूप पुराना होता हैं
दुनिया की नजरों में ये
 बेढंगे - बेकार नजर आाते हैं
अखबार पुराना  खुद रद्दी बन जाता हैं
मोबाइल  ई- कचरा  कहलाता हैं
मैं ही क्यो बताऊ सारी बातें
 जमाना सब कुछ जानता हैं
उम्रदराज देवियों - परियों का
 कोई अपना नहीं होता
अौर
 पराये लोग इन्हें कैसे पूजते हैं ।

आज शीतलाष्टमी हैं
 शुक्रगुजार शीतला माता का
इक दिन  ही सही 👍 साल में
बासा खाना,बासा पानी
अौर पुराने कपड़ों की
आज तासिर बदल जाती हैं

आज के  दिन-  शीतलाष्टमी को
दादा - दादी आदर पाते
 पुराणों - वेदों की महिमा गाते
हवाई जहाज़ में उडने वाले
सोचते हैं कि
दुख- दरिदता दूर  रहे उनसे
बस यही सोच के साथ आज वो
" दरिदता की देवी "
 सैढ़ माता -शीतलामात
का वाहन 🚗 गधा   को भी  पूजते हैं।

सादर : शिवराम मीमरोठ

आज का समय

आज का समय
......................................
अक्सर  जहन में इक विचार
बार बार आता  हैं
इस जहाँ में तीन लोग रहते हैं
इक घर 🏠 गृहस्थी
दूजा चिर कँवारा सन्यासी
बात काम की इक और सुनो
तिजा अघोषित भगोड़ा।

शादी करली  जिसने समय पर
वो सोचते हैं कि वो ही
 बुद्धिमान है जहाँ में
अरे भई फस चुके हैं वो मोह जाल में
सारे कानून बने
 उनके पालन के लिए
सौ टैक्स रोज के भरते बेरोजगार
अोर सोचते हैं जिन्दगी बीत रही है
मजे से आधा पेट भरते भरते ।

जो रह गये चिर कँवारे
👓 चश्मा तक नहीं लगाते
सार्वजनिक जगहों पर घूरती नजरों से
नजारों की नजाकत लेते हुए
 कोई मठ में मठाधीश बन बैठा
किसी धाम  में  मंहत बन बैठे
आश्रम में गद्दी पर पदासीन हो कर
बौद्ध भिक्षु दलाई लामा बन बैठे
राज योग हुआ तो राजगद्दी पर सी एम बन बैठेंगे,
मैथस् पढ़ी हैं उन्होंने कैरियर बना लिया हैं
 गुणा बढ़ाये, भाग को देखा ,
जो पसन्द  नहीं आया,माईनस कर दिया
 योग  ज्यादा किये तो  योगी कहलाऐं ।

घोडे भी नहीं दौडे तिसरे इतनी तेजी से दौड़े
अग्नी के समक्ष सात फेरे लेके
 जीवन परीक्षा में जो फेल होके
 पत्नी को छोड़के भागे भगोड़े
कई सफल साधु  बने फिरे तो
कई सफल राजनेता बन बैठे
कब किस के भाग्य 🌠 ने पलटी मारी
टळ गये अटल , उडनछुं हुए अडनछूं
जब पासा भाग्य ने सियासी पलटा
जननायक ,लोकनायक,जनमान्य
सर्वप्रिय राष्ट्रनायक बन बैठे।

सादर : शिवराम मीमरोठ

पप्पू ! पिछा छोडदे

पप्पू  ! पिछा छोडदे
.................................                                                                       
पप्पू !
अब तो  मिठा हो जाये,
 मिजाज देश का  बदल रहा है
सत्ता के  गलियारों में
सिंगल  और  कुवाँरों ने
धूम मचा डाली हैं
गाँवों  में लोग कह रहे थे
बारह साल में  एक बार तो
रेवडा(Dustbin) की भी दशा बदलती हैं
अब आराम करले पप्पू  तेरे भी
अच्छे दिन आने वाले हैं।

दुनिया की नजरों में पप्पू
तुम भी सिंगल सिंगल  दिखते हो
और धैर्य रखना पप्पू शादी मत करना
बूढ़ी घोड़ी की बैठ पीठ पर
चाहे तांगे में  चलवा देना
बिना मुसाफिर चाहे खाली ही चले तेरा तांगा
मगर माँ को पता पर नहीं चलना चाहिए
हर राज पर तु पर्दा रखना
प्रतिस्पर्धा में जीत की तु मन में  चाह रखना।

पप्पू ! तु तो अबकी दफा
रक्षाबंधन पर दिखा दे वफा
धर्म निभा भैया का  और
राखी बंधाने में  गिफ्ट दे दे
पाटीं की  कमान बहन  जी को
प्यारे प्यारे बच्चों के चँदा मामा बनके
वरना तु डेबो देगा खान नांव को कच्छ खाड़ी में गुजराती मछवारों के हाथों ✋
पप्पू अब  देश में 365 दिन नजरों में
" वेलेन्टाईन डे " सा नजारा नजर आता है
पप्पू तेरी जन्म कुंडली में तेरे ही  नाम
के पहले दो अक्षरों (राहु) का प्रकोप नजर आता हैं।
लगता तो हैं कि तेरे करीबी
शनी  और केतु कुठाराघात की ताक में  हैं
वरना गोआ, मणिपुर व उत्तराखंड में
ताजपोशी से नहीं चूकता ।

 पप्पू, ! पप्पू  ! पप्पू  !
अब तो सम्भलजा ! समझ जा !
तेरी नादानी से देश की  जनता फ्रि के आफर के चक्कर में सुरसा के मुंह 👄  मे धसती जा रही  हैं
और
 पप्पू   तेरे देश की  राजनीति
तानाशाहों की  तानाशाही सोच की
परिधी की  गिरफ्त में गिरफ्तारसी
नजर आती हैं
चाहो तो सही 👍 वक्त तकदा समझो
महारानी को विश्वास में लो
 और चल दो अब कुटिल चाल
उतार दो बिसात  पर अब
खानदानी ट्रंप कार्ड 🃏 को
वरना 2019 के बाद तुम्हें अर्जी लगानी पडेगी USA में नागरिकता की
डोनाल्र् ट्र्ंप के व्हाइट हाउस में ।

 सादर : शिवराम मीमरोठ

माना कि आपका असबाब कीमती हैं

माना कि आपका असबाब कीमती हैं
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

माना कि आपका दिया हुआ
असबाब कीमती हैं
लेकिन उपर वाले का दिया हुआ ये जीवन सबसे ज्यादा कीमती  हैं
मैंने सींचा मैंने सँवारा ये मेरा दिल 💘
अनमोल कीमती है।

जीवन में सफल होने के लिए योग्यताएँ मँजिल की राह में राहगीर होती हैं
पर जिन्दगी में सफल बने रहने के लिए
चारित्ररिक नैतिकता ही मायने रखती हैं
जो मिलतीं हैं पुश्तैनी वसीयत में।

प्यार करो  उस सुन्दरसी सपनों की मुरत को
जो अपना  घर परिवार 👪 त्यागके  तुमको और तुम्हारी सब चीजों को अपनाती हैं
मगर सबसे पहले  और सबसे ज्यादा  प्यार 💘 करो
उन महामानव ( माँ - बाप) युगल को
जो तुम्हें  दुनिया में आने का अवसर दिया ।

अहसान अदा करना मत भूलो सृष्टि के सृजनकर्ता का , जिसके आँगन से  तुम आये हो
खेलों कूदों और धूम मचालो जब तलक दुनिया में  हो
खेल खत्म होते ही जीवन का दरबार
वहीँ पर लगना हैं,
अर्ज फरमाता हूँ जरा गौर करना
 अहसान  तो पहले माँ -बाप का ही  जताना।

सादर : शिवराम  मीमरोठ
मण्डल बिजली इंजीनियर

All level fellow

All level fellow
.......................
Sub : Present scenario of world
Ref : My reflation

1) At This time in world but specially in Indian a social administrative environment are under going a bad smelling polluted felling flying air, mostly by virtual world to humanities decimal level control system of human i.e critical person fully used to this practices.
                                                                                                                       2)  Although they are oppose system and polices of Government , which are built-ed by forefather's of him. And they have internal jealously fired and burnt the soul not only country but also whole element of originator of the this peace of land.

3) Even although in whole world  such type of persons are try to getting opportunity in India, USA and same also in Muslim countries on the basis of some heart touching items like wise Dalit n Originator Vs outsider, Black Vs White , Fertilized Vs Muslim in India, USA and in Muslim countries respectively.

4) In reference of India cleaver man playing the game by touching of   twin Golden rope one is anti reservation and second is anti Muslim, according they have planed to establishing "elite Hinduism" ( Not for common Hindu ) Kingdom ship by pushing of Dalit , originator & Muslim.
5) Even although,  "elite Hinduism" hero made fool to all Muslim in view putting anti vision of Dalit n Originator and getting support of Muslim and vice versa.

वजह तुम हो ------------------

वजह तुम हो
------------------

वजह तुम हो, अब तो,
जो हम जी रहे हैं
 आँखों  से यूँ हम जो पी रहे हैं,
वरना अबतलक तो ,
आँख बंद कर हम प्यासे
प्यास में, प्यासे ही मर जाते ।

प्यास  बुझाने ये प्यासा
कुआँ बावड़ी, नदियाँ  और दरिया
 और सागर तट जा भटका,
प्यास छुपा कर सागर से,
 प्यासे ही  हम लौटे,
तेरे होठों से कुछ बूंदें स्वाति (अमृत)
पीने को अरमान हमारे दिल में अटके ।

कई दफा हम प्यासे,
प्यास बुझाने चश्मे पर पहुंचे
चश्मा 👓 लगाकर
चश्मे में अर्धनग्न नहाती
परियों को देखा,
चक्षुओं को चेहरा तेहरा
जब पाणी में नजर आया,
हम सूखें होठ प्यासे ही
जीने के लिए  प्यासे हीलौटे।

बच्चन की मधुशाला पढ़ कर
पहुंच गये मदिरालय हम
मदिरा से प्यास बुझाने,
पर सांकि की  चाल - ढाल
 और  हाल देखकर
होठों नहीं छु पाये प्याला
तिरछी नजरों से यूँ ही पी आये
हम हाला
 और
चल  आये हम  बच्चन की छोड मधुशाला
  अब हर रोज  मदिरा पीतो हैं ,
सुर्ख तुम्हारे होठों से ।

सादर : शिवराम मीमरोठ
दि: २५-०३-१७ शनिवार,
प्रात: ५-३० बजे

उफ! सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज करने।

उफ! सौ चूहे  खा के बिल्ली चली हज करने।
 ......................................,..............

पहले जब हम बच्चे थे
सड़क पर आने से डरते थे
जब हम दिल 💘 के कच्चे थे
पर मन से एकदम सच्चे  थे
 लोगों को  देखा करते  थे
आते जाते सडक पर,
 जब बीच सडक के गढे थे ।

ज्यों ज्यों हम बड़े हुए
त्यों  त्यों सड़कों पर आने का
 शुरु हुआ सिलसिला
मगर जब हम पैदल ही चलते थे
तब साईकल वाले से  भी डरते थे
प्रोढ़ हुए तो बाइक 🚲 लाये
और कार की टक्कर से डरते थे
अब  जब कार चलाता हूँ
तो सब से डरता हूँ
साईकल, बाइक, पैदल चलनेवाले
 कार को टक्कर ना दे मारे
बस ! यही सोचके
बचने के खातिर
 उल्टा  कार साइड मैं कर लेता हूँ।

जयपुर की सडकों पर कैसे चले हम
दाई तरफ से आये मिनी बस 🚌
लाल कलर की खतरे का सिंबल
बाईं  तरफ बाइक 🚲 आई,
बाइक 🚲 पर बैठी इक बाई 👩
लगती नहीं बाइक पर बैठी हो वो 👩
अरे, बाइक 🚲 पर नहीं बैठी वो 👩
बैठी है वो 👩 झुककर ऐसे जैसे
लडके 👨 की पीठ पर बैठी हो वो 👩
बीच सडक पर लडका 👨
 बाईक में यूँ ब्रेकिंग करता
लडकी 👩 का वक्ष लडके 👨  की पीठ से ऐसे गुदगुदाएं,
मानो कि गुब्बारा 🎈 बाज के पंजों में खिलखिलाऐ
पर हम करे तो क्या करें
हमरी कार 🚗 का इंजन ट्राफिक पुलिस 👮  के हवलदार के मानद
झाम सडक पर यूँ गिडगिडाये
भगवान भी नहीं
केवल  आदित्य नाथ योगी
इन रोमियों से बचाएं ।

बाईक पर राइडर की उँची  शीट पर बैठी ये बाईं। 👩
इतनी भीड में बीच सडक पर,
अपने 👩 वक्ष को चालक लडके 👨   की पीठ से
गुदगुदाने में कतई नहीं  शर्मायी
फिर भला शहर के हरे भरे पार्कों में
कॅालेज के हॅास्टल में ,
 होटल 🏨 की बार में
सिनेमा हॉल की बालकॅानी में
मौका मिले कभी तो चारपाई में
नो एण्ट्री में एण्ट्री करने से
USA की सील मिलीट्री भी रोक नहीं पाई,
जीवनपर्यंत करवा चौथ का वृत  भी रखती हैं ,
ये बाद में  पता नहीं
लॅाईक वाले के लिए या
 बाईक वाले के  लिए
चरितार्थ हो ही जाती हे कहावत
सौ चूहे  खा कर बिल्ली चली हज करने।

सादर : शिवराम मीमरोठ
दि: 25.03.17 समय :12.32 बजे

सिस्टमेटिक अपग्रेडेशन

सिस्टमेटिक अपग्रेडेशन
......................................................
पहले पहल जब हम, कविता लिखते थे
खेत खलिहानों में, गाँव की गली मोहल्लों मे
Love poems के मूल शब्द हम
बायीं हथेली पर ही लिख लेते थे
घर 🏠 पर आकर सांझ सवेरे, हाथ धोने से पहले
हथेली से मूल शब्द लेके रद्दी कागज़ पर,
भ हम हर रोज लाल रंग में पाण्डुलिपी लिखते थे
वक्त गुजरता रहा, लोग बदलते रहे
देश डवलप होता रहा,
हम हाथों ✋में कविता ले बैठे रहे ।
शताब्दी के शुरूआत में आधुनिकता की आँधी
हमरे जहन तलक आ पहुंची
कलैण्डर छपी इक वार्षिक डायरी अनायास ही
उनके हाथों से हमरे हाथों ✋ में आ धमकी
रद्दी कागज में लिखी पाण्डुलिपी अब
डायरी में छपके धीरे से चुपके से
सज सँवर कर कविता,
दुल्हन 👰 के मानद चाहत में तब्दील होने लगी
और नज्म बन राईटर की भावनाओं से खेलने लगी
धीरे धीरे कभी इधर के दिल 💘 के तो,
कभी कभी उधर के दिल 💘 के भी दरवाजे
मेरी नज्म, गजल, कविता खोलने लगी।
अब मार्डन पिंकसिटी का असर देखलो
स्मार्ट फोन के प्रचलन से अब राईटर हुआ हाइटेक
कागज़ कलम दवात की अब पडती नहीं जरूरत
बिडला आडिटोरियम में हास्य कवि
अशोक चक्रधर जी ने हमको सिखा दिया
इक नायाब तरीका
स्मार्ट फोन में स्मार्ट तरिके से
सीधे ही स्मार्ट कविता लिखना
और
साहिब ने सिखला दिया हमको
सोशियल मीडिया का सद्उपयोग करना
फेसबक, व्हाटस्एप, व्टिटर पर कविता अपलोड करना।
सादर: शिवराम मीमरोठ
रविवार 07.30 बजे
दिनांक: 26.03.2017