नींद ख्वाब सोना
जब चाह में मिरा तकिया का नाम
यूं ही हमने तिरा नाम पे रख दिया
मिरा तकिया मिरा दोस्त बन गया
भाव जो खाते थे नजर जो फेरते थे
हमे यतीम समझ के कहते थे उनका
दिल लॉकर में रखा छोडा ऐसा कहते
तेरे नाम से तकिए ने जख्म सही दिया
तुनामी तकिएसंग ख्वाबों में होता हूं
तिरी नीली आंखो में चेहरा खुद का
शुरू से नींद में दिखा तो करता था
इश्कसे पहले आंखों ने धोखा दिया
दोष किस की आंखो में था पता नही
आइने में मेरी आंखे तुझे खोजती रही
तिरे बगल में तिरी सहेली दिखती थी
तकिए से खफा आइने ने यूं धोखा दिया
तुनामी तकिया ज्यादा मुलायम यूं हुआ
या मेरे ही दिल को लगता तिरे नाम संग
मैने थोड़ा सा भी कुछ तुझसे नही लिया
मजा तिरे नाम के तकिए ने ज्यादा दिया
बाहों में सिमटता तिरे नाम का ये तकिया ,
मुझे अच्छा लगता तिरा नाम का ये तकिया
तकिए ने जंघाओं के आलिंगन में दुबक के
तिरे होने का अहसास कल ताजा कर दिया
तुनामी तकिया शिकायत मुझसे करे तिरि
मुझे नाचीज़ कहे और तुझे सब चीज कहे
ग्रीवा पसरी तो थी तकिए पर तुम्हारी भी
फिर तकिए ने आरोप मुझ पर लगा दिया
कैसे छुडाऊ पीछा तिरे नाम के तकिए से
तकिए में तुम हो या तुम ही खुद तकिया हो
मेरी जिंदगी में तिरे नाम तकिए ने मेरे लिए
तिरे नाम के तकिया को कलाम बना दिया।
सादर : शिव राम मीमरोठ
कॉपी राइट @रिजर्व
No comments:
Post a Comment