माना की संग दिल हूं !
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कब्ज होने से पहले प्रेमिका की नब्ज़ देखना पहला प्रेम है
एक ने निरस्त किया दो से जताने पूर्व निरस्तीकरण ही आखरी प्रेम है
इशारे समझा, वैरागी समझना,वैराग धर्म मेरा उनसे आखरी प्रेम है
कौनसी भूल हुई जो उनके मर्म के मूल में पहुंच गए हम भूल से
मन पढ़ना उनका कोई पहेली नही समझ में आ गया
ये आखरी प्रेम है
समझना इतना भी कठिन नही किसी के मन को जो केमिस्ट्री से आसान है
उन्हे छोड़ने के बाद इन्हे जताने से पहले इनका इनकार आखरी प्रेम है
माना की संग दिल
हूं , उनका असंग, संग दिल पर लकीर सी है
जताने से पहले बिन बताएं उनका इनकार श्रष्टि से मेरा आखरी प्रेम है
मान लिया, पीछा छोड़ दिया हवा का अब सहारा केवल दावा का,
पेड़ से सूखे तिनके चुन घरौंदा बुन पक्षी ने जताया आखरी प्रेम है
सादर: शिव राम मीमरो
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