Saturday, 12 October 2024

 मौन का मौन संवाद

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बोलते ही शब्द वजन छीन लेते है मनभावों से
मौन में मौन का, प्रेम का संवाद हुआ आंखों से
न कभी मिलने की चाहत रही, न चाहत पाने की
दिल खुश होता है,उन्हे नींद में महसूस करने से
मिलने से भला जो होगा बिन मिले महसूस करू
वो भी तो डरते है खुदा, खुदा की तरह मिलने से
भीड़ में खोजते उन्हे खुदा,अपने परायों में देखते
दिल मान गया प्रेम में, वो बच गए दिल लगाने से
नाम कोई लेवे उनका , हम पीछे मुड़के देखते
कंखिया त्योरियां नजरे उन्हें देखती पलकों से
प्रेम युद्ध में अहसास_भावना बहे अश्कों में
वो जीत जाए जंग, हमें खुशी प्रेम में हारने से
खोने पाने के अहसास समरस हुए अब मेरे
दिल ऐसा लगा गौतम बुद्ध का आम्रपाली से
छुआ नहीं आंखों ने जिस्म,वक्ष अधर अतके
गीता कहे प्रेम निष्काम करे जिस्म या रूह से
प्रेम में विश्वास हो तो अच्छे वर्ना विषवास होगा
हम वन चले,नो में से तीन गए,सीता कहे राम से
प्रेम में भीगे मन प्रेमी का, प्रेम तन भिगोता नही
प्रेम की वर्षा में हो खुदा, हमें परहेज नहीं नहाने से
प्रेम में जिव्हा खामोश, अधर सिले हुए शून्य में
सांसों ने महसूस किया प्रेम, आंखो के कहने से
सादर: शिव राम मीमरोठ
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