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अभी से वो नजरफेर हो गए
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एक सी सोच रही एक सा ख्याल एक सा स्वप्न रहा
पहले अलग अलग दो जिस्म थे फिर एक रुह हो गए
पास बैठे बतियाने निस्वाशों की गर्म हवा स्वास बने
निस्वासों से हवा ले फेफड़े दिल के और पास हो गए
छूते नही उन्हे,बिजली है वो,उन्हे छूने से लगे करेंट
बिन छुए बिन चखे लव में लब उनके लजीज हो गए
उन्हें नही पता उनकी परछाई भी दिल अजीज है
वजह कुछ, ठोस रही होगी जो वो हरजाई हों गए
हमें देख भौंहे तिरछी करी और नाक सुकेड़ी क्यों
होठ वक्र हुए उनके ठोडी तक हम अजनबी हो गए
उन्हे पूजा ह्रदय में मैंने समझ कभी लैला कभी राधा
मन मैला हुआ मेरा दिल तोड़ के वो गुनहगार हो गए
कई मर्तबा दिल तोडा,दिल मेरा कमबख्त जुड़ गया
मुंह मोड़ भी लेंगे वो, कभी अभी से नजरफेर हो गए
उनकी कातिल नजर से निगाह में जकड़ा रहा दिल
बिन पंख बिन उड़े वो मेरी दुनिया से फरार हो गए
पहले इश्क में दर्द कम था जब प्यार उनका दवा था
अब दवा सहित औषधालय से वो वैध हवा हो गए
सादर : शिव राम मीमरोठ दुर्गेश
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