पर वो बात नहीं माँ इन उँगली में
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ऐ ओ सुन मेरे खुदा
मुझे एक और ज़िंदगी दे,
ये भी कोई जीवन है
ये भी कोई जीवन है
मैं साथ रहूँ हर पल उनके
वो साथ रहे हर क्षण हमके
जीवन जी लेवे मिलकर खुलके
कहीं किसी और पे हुआ नहीं
ये मेरा दिल फ़िदा ए ओ मेरे खुदा
मुझे अब , उनसे मिलने को
ऐ मेरे खुदा मुझे एक और ज़िंदगी दे।।
मेरी ये जीवन यूँ ही बीता,
जीवन बीता ख़ाली शून्य में रीता सा
ना तो मिली कोई सीता सी
ना मिला उपदेश कोई गीता सा
क्यों और ख़राबी मैं जिलु मैं
क्या बन के शराबी पी लूँ मैं
अब तू ही वजह बता जीने की
वरना वरना नहीं तो नहीं तो
मुझे अब , उनसे मिलने को
ऐ मेरे खुदा मुझे एक और ज़िंदगी दे।।
एक ऐसा जीवन दे जिसमें ना हो
माँ मेरी मुझसे जुदा
कुछ दिन खेला कूदा मस्ती में
माँ तेरे आँचल में उसी पुरानी बस्ती में
मेरा जिस्म ढला जिसके जिस्म के साँचे में
उनसे मिला दे रे उनको बुला दे रे
नवम्बर नहीं दिसंबर नहीं
माँ से जुदाई का महीना सितंबर था
सितंबर ने सितम ढाएँ
उनसे मिला दे रे उनको बुला दे रे
या कहदे मिलना भी तो संभव नहीं
नहीं तो नहीं तो
मुझे अब , उनसे मिलने को
ऐ मेरे खुदा मुझे एक और ज़िंदगी दे।।
क्या बुरा किया मैंने बचपन में
जो माँ की उँगली छूट गई,
बाद में तेरे माँ मेरी माँ
उँगली तो ललनाओं की बहुतेरी पकड़ी
और पकडली उँगली बहूँ तेरी की
पर वो बात नहीं माँ इन उँगली में
जो बात मिली माँ मेरी तेरी उँगली में,
जब याद करूँ मेरी माँ तुझको
मेरी आँखों में पानी भर आये
उँगली पकड़ कर चलना सिखाया
चलना ही नहीं,उँगली पकड़ खाना सिखाया
जननी का जब से साथ नहीं
जीवन में अब वो बात नहीं
मुझे अब , उनसे मिलने को
ऐ मेरे खुदा मुझे एक और ज़िंदगी दे।।
मेरा जीवन वही था जो माँ सैंग जिया
मेरी लिए गीता वही है जो वो कह गये
जाने के बाद तुम्हारे माँ
कैसी दिवाली,कैसी होली
उस दिन बाद नहीं मन से खेली
अब निकले चाहे किसी की डोली
मुझे लगती हर चीज क्यों भोली
पर मुझे याद है मेरी माँ,
जो जाते जाते तू माँ मुझे बोली
मुझे अब , उनसे मिलने को
ऐ मेरे खुदा मुझे एक और ज़िंदगी दे।।
@कॉपी राइट रिज़र्व
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