" क्यां रावण जिन्दा था कल तक V/s दशहरा"
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बचपन से सुनते आ रहे है
रावण का दहन हैं, आज,
गुनाह क्या था रावण का जो जलता आ रहा है
आज तक
क्यां रावण जिन्दा था कल तक ? ----(१)
पीड़ा नही होती जलने में
और
जलाने में रावण को
यह प्रथा महज
एक भूल, भुलैया हैं
रावण मरा नही कभी
और
मरेगा भी नही अभी
रावण जिन्दा था कल तलक
वो जिन्दा है आज भी----------------(२)
एक राम ने एक रावन पर
एक वार किया था रण में
धनुष तीर से
पर बच निकल असली योद्धा रावण रण में
राम कन्फ्यूज़ हुआ
युद्ध विराम घोषित हुआ
रण की गफलत में -------------------(३)
अजरता का अमरता का
वरदान निभाने
भक्त के वास्ते भागवान भागे
रूप धर के रावण का
रण में
राम के सामने रावण की जगह " भक्त वत्सल "
स्यवं महादेव आ गए लड़ने रण में
मंदोदरी की प्रार्थना पर----------------(४)
नजारा भांप के रण में
मौंके की नजाकत जान के रण में
मंदोदरी की शक्ति पहचान के
सीता का मन जान के की
माँ पार्वती ने भेजा भोले को
टूट गए श्रीराम धनुधारी
अंदर ही अंदर
बच निकले जिन्दा लंकेश दशकंधर-----(५)
मान रखने भोले का
भेद खोला नही रण में
श्रीराम ने
आँख बंद करली
मूर्छित महादेव ने
रावण के भेष में रण में
अफ़सोस देख के राम का
धरां धंस गई,
रावण जिन्दा जमींदोज हो गया राम के सामने ------(५)
फिर भी आज तक लोग रावण जलाते हैं
भला रावण जलेगा क्या
भला रावण मरेगा क्या
अब सतयुगी रावण को जलाने का तुच्छ सा प्रयास करता है,
आज का कलयुगी रावण
सच में,
राम सा चरित्र,
राम सा पवित्र
आदमी जलाये तो
रावण जले, रावण मरे
वरना तो आप भी जानते है हर साल दशहरा तो आयेगा -------(६)
हिन्दू परम्परा बोलती हैं
बड़े, बूढ़े बुजर्गो को
वंशज, नाती, पोते ही तो
जलते है,
भला गैरो ने तो कभी लावारिश लाशें फुकीं होंगी
शासकीय शमाशानघाट में
नगरपालिका के खर्चे पर------------(९)
रावण का कुल ,
बड़ा सारा भरा पूरा कुनबा
था और हैं आज भी
जो हर साल दशहरा पर निभाते है,
प्रथा जलाने की
हुए ना रावण के वंशज
रावण को जलाने वाले --------------(८)
समय बदला , जमाने के साथ रावण भी बदला
पहले मुर्दे कंधो पर सजते थे
" शिव राम "आज जयपुर की बड़ी सड़को का नजारा भी नजीर था
खुद "मीमरोठ" ने देखा हैं
JLN मार्ग पर रावण का Safsri और Inova की छत पर लेटा था
MI Road का हाल अजीब था आलीशान रावण
Pajaro और
Furtunor पर पसरा था......--..(१०)
सादर: शिव राम मीमरोठ